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Fri. Jan 23rd, 2026

उत्तराखंड में गूंज रहे बैठकी होली के गीत..

उत्तराखंड में गूंज रहे बैठकी होली के गीत..

रामनगर में नई पीढ़ी समझ रही ‘रागों’ का ‘राज’..

 

 

 

 

उत्तराखंड: प्रदेश के कुमाऊं में इन दिनों बैठकी होली का दौर चल रहा हैं। उत्तराखंड के कुमाऊं में होली गायन की परंपरा ऐतिहासिक है। पर्वतीय क्षेत्रों में होली गीत गायन का इतिहास 1000 साल से भी अधिक पुराना है। ऐसी मान्यता है कि कुमाऊं में होली गीतों के गायन की शुरुआत सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा से हुई। बता दे कि हर साल बैठकी होली पौष महीने से शुरू होती है। होली गायन की खुशबू बसंत पंचमी के दिन तक महकती है। कुमाऊं में पौष मास से शुरू हुई बैठकी होली के गीत इन दिनों रामनगर के साथ ही नैनीताल, अल्मोड़ा और हल्द्वानी आदि शहरों में गूंज रहे हैं। कुमाऊंनी होली पूरे देश दुनिया में अपनी खास पहचान रखते हैं। भारी ठंड के बीच कुमाऊं मंडल के अलग-अलग जगहों में इन रातों में निर्वाण का होली गायन चल रहा है। इन्हें विभिन्न रागों में गाया जाता है।

चंद वंश के समय की मानी जाती है बैठकी होली..

मान्यता है कि कुमाऊं में बैठकी होली की परंपरा 15वीं शताब्दी से शुरू हुई। चंद वंश के शासनकाल से होली गायन की परंपरा शुरू हुई। काली कुमाऊं, गुमदेश व सुई से शुरू होकर यह धीरे-धीरे सभी जगह फैल गई। आज पूरे कुमाऊं पर इसका रंग चढ़ गया है। होली गायन गणेश पूजन से शुरू होकर पशुपतिनाथ शिव की आराधना के साथ-साथ ब्रज के राधाकृष्ण की हंसी-ठिठोली से सराबोर होता है। शास्त्रीय रागों पर आधारित बैठकी होली घरों और मंदिरों में गाई जाती है।

रागों पर आधारित है बैठकी होली..

बैठकी होली में विभिन्न रागों में होली गायन होता। “भव भंजन गुन गाऊं, मैं अपने राम को रिझाऊं” से होली गायन की शुरुआत और “क्या जिन्दगी का ठिकाना, फिरते मन क्यों रे भुलाना, कहां गये भीम कहां दुर्योधन, कहां पार्थ बलवाना, “गणपति को भेज लीजे, रसिक वह तो आदि कहावे” का गायन किया जाता। होली गायन में बड़ी संख्या में बुजुर्ग, युवा और बच्चे शामिल होते हैं।

क्या कहते हैं होली गायक..

होली गायक शेखर चंद जोशी कहते हैं कि उद्देश्य यह है कि आने वाली पीढ़ी बैठकी होली में बैठे और इसको सीखे। वहीं पूर्व शिक्षक विपिन कुमार पंत कहते हैं कि चंद वंश के समय से होली गायन का यह दौर शुरू हुआ था। यह शास्त्रीय संगीत पर आधारित है। राग भैरवी और अलग-अलग रागों का मिश्रण है। इस समय जाड़ों में लोग आग जलाकर एक जगह इकट्ठा होकर इस बैठकीय होली का लुत्फ उठाते हैं।

 

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