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हेलिकॉप्टर क्रैश हादसा: लापरवाही में दर्ज हुआ केस, 7 की मौत के लिए दो मैनेजरों पर जिम्मेदारी तय

रुद्रप्रयाग के गौरीकुंड क्षेत्र में हुए हेलिकॉप्टर हादसे को लेकर बड़ा एक्शन लिया गया है। हादसे में सात लोगों की मौत के बाद आर्यन हेली एविएशन कंपनी के दो मैनेजरों – विकास तोमर और कौशिक पाठक – के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। फाटा के राजस्व उप निरीक्षक ने सोनप्रयाग पुलिस थाने में तहरीर देकर यह मामला दर्ज कराया।

स्लॉट से पहले उड़ान बनी हादसे की वजह
तहरीर के मुताबिक, आर्यन कंपनी को सुबह 6 से 7 बजे के बीच का उड़ान स्लॉट मिला था, लेकिन हेलिकॉप्टर ने निर्धारित समय से पहले यानी सुबह 5:11 बजे ही उड़ान भर दी। यह उड़ान केदारनाथ से गुप्तकाशी के लिए थी और लगभग 5:24 बजे हेलिकॉप्टर गौरीमाई खर्क के जंगल में क्रैश हो गया। आरोप है कि कंपनी ने डीजीसीए और यूकाडा द्वारा निर्धारित SOP का पालन नहीं किया।

कानूनी कार्रवाई शुरू
राजस्व उप निरीक्षक ने इस हादसे के लिए कंपनी के दोनों वरिष्ठ अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए कहा कि यह लापरवाही नहीं, बल्कि दायित्वों की गंभीर अनदेखी है। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 और वायुयान अधिनियम 1934 की धारा 10 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। कोतवाली सोनप्रयाग में केस संख्या 28/2025 के अंतर्गत मामला दर्ज होते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

प्रत्यक्षदर्शी बहनों ने बताई हादसे की पूरी कहानी
घटना के चश्मदीद गवाह नेपाली मूल की शर्मिला और संजू ने बताया कि हादसे के समय घना कोहरा छा गया था। वे दोनों महिलाएं गौरी माई खर्क में घास काटने गई थीं। उन्होंने बताया कि हेलिकॉप्टर को उड़ते देखा, लेकिन अचानक दृश्यता घटने के कारण वह दिशा बदलते हुए एक ऊंचे पेड़ से टकरा गया और ज़मीन पर गिरकर आग की लपटों में जल उठा। शर्मिला ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद घटनास्थल पर पहुंचने पर एक बच्ची मृत अवस्था में मिली, जो संभवतः गिरकर पत्थर से टकराई थी।

DGCA ने रोकी आर्यन एविएशन की सेवाएं
हादसे के बाद DGCA ने चारधाम यात्रा के लिए आर्यन एविएशन कंपनी की उड़ानों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके अलावा ट्रांस भारत एविएशन के दो हेलिकॉप्टरों को भी खराब मौसम में उड़ान भरते पाए जाने पर संबंधित पायलटों के लाइसेंस छह महीने के लिए सस्पेंड कर दिए गए हैं।

हादसे का विवरण
15 जून को सुबह 5:21 बजे आर्यन हेली का हेलिकॉप्टर छह यात्रियों को लेकर केदारनाथ से गुप्तकाशी के लिए रवाना हुआ। लेकिन 5:25 बजे गौरीमाई खर्क के पास कोहरे के कारण पेड़ से टकराकर क्रैश हो गया। हादसे में पायलट लेफ्टिनेंट कर्नल (सेनि.) राजवीर सिंह चौहान सहित सभी सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में एक 23 माह की मासूम बच्ची और उसके माता-पिता भी शामिल थे।

राहत कार्य में जुटी टीम
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, डीडीआरएफ, पुलिस और यात्रा प्रबंधन बल ने घटनास्थल पर पहुंचकर शवों को बरामद किया और उन्हें गौरीकुंड होते हुए जिला अस्पताल, रुद्रप्रयाग भेजा गया।

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