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Fri. Jan 23rd, 2026

कुपोषण पर सख्ती अधिकारियों को आंगनबाड़ी केंद्रों में भोजन चखने के निर्देश..

कुपोषण पर सख्ती अधिकारियों को आंगनबाड़ी केंद्रों में भोजन चखने के निर्देश..

 

 

 

उत्तराखंड: राज्य महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग ने कुपोषण पर रोक लगाने और आंगनबाड़ी केंद्रों में भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। विभाग की निदेशक रंजना राजगुरु ने जिला कार्यक्रम अधिकारियों से लेकर सुपरवाइजर स्तर तक के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण करें और वहां तैयार हो रहे भोजन को स्वयं चखें। अधिकारियों को यह भी चेतावनी दी गई है कि यह अंतिम मौका है। यदि लापरवाही मिली तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण भोजन से बच्चों में कुपोषण की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

राज्य महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी केंद्रों में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। विभाग की निदेशक रंजना राजगुरु ने कहा कि यदि निरीक्षण के दौरान कोई कमी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए निर्देश का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों में परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता की सीधी जांच करना है। निर्देशक ने जिला कार्यक्रम अधिकारियों, ब्लॉक के बाल विकास परियोजना अधिकारियों और सभी सुपरवाइजरों को निरीक्षण कार्य अनिवार्य रूप से शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

वे दौरे के दौरान भोजन की गुणवत्ता को सबसे पहले परखेंगे। यह निर्देश राज्य में सभी जिलों के लिए 13 कार्यक्रम अधिकारी, ब्लॉक स्तरीय 105 बाल परियोजना अधिकारी और आंगनबाड़ी केंद्रों के 595 सुपरवाइजरों के लिए महत्वपूर्ण हैं। विभाग ने जिलों के संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि वे जिस भी आंगनबाड़ी केंद्र का दौरा करें, वहां मौजूद वजन मशीनों की सटीकता भी परखें। कुछ जगह से वजन मशीनों की सटीकता सही न होने की शिकायत मिली है। ऐसे में मशीनों की उपयोगिता और पोषण अभियान का अर्थ नहीं रह जाता। मशीनों की जांच सुनिश्चित करने का मकसद है कि बच्चों के पोषण स्तर का सटीक आकलन किया जा सके। साथ ही कुपोषण की सही पहचान कर उस पर प्रभावी ढंग से काम किया जा सके। कुछ स्थानों से शिकायत मिली है कि वजन मशीनें सही नहीं हैं, जिससे बच्चों के पोषण स्तर का सटीक आकलन संभव नहीं हो पाता। विभाग का मानना है कि सही वजन मापने से कुपोषण की पहचान और सुधार के प्रयास प्रभावी होंगे।

 

 

 

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