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भालू-गुलदार प्रभावित क्षेत्रों में लगाए जाएंगे सोलर लाइट और बुश कटर..

भालू-गुलदार प्रभावित क्षेत्रों में लगाए जाएंगे सोलर लाइट और बुश कटर..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में हाल के महीनों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखने को मिली है। भालू और गुलदार की बढ़ती गतिविधियों ने पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बीच भय का माहौल पैदा कर दिया है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए सीएम पुष्कर सिंह धामी और वन मंत्री सुबोध उनियाल के बीच उच्चस्तरीय वार्ता हुई, जिसके बाद राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने प्रमुख वन संरक्षक को निर्देश दिए हैं कि भालू व गुलदार प्रभावित 20 वन प्रभागों में पचास-पचास सोलर लाइटें लगाई जाएं, ताकि अंधेरे का फायदा उठाकर वन्यजीव मानव बस्तियों में प्रवेश न कर सकें। इसके साथ ही, झाड़ियां और घनी वनस्पति काटने के लिए प्रत्येक प्रभाग में 25-25 बुश कटर उपलब्ध कराने के आदेश भी जारी किए गए हैं।

मंत्री ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विभागों को फॉक्स लाइट, वन्यजीवों को बेहोश करने वाले उपकरण और अन्य आवश्यक संसाधन भी मुहैया कराए जाएंगे, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई संभव हो सके। सरकार ने इस दिशा में जनप्रतिनिधियों से भी सहयोग मांगा है। वन मंत्री ने राज्यसभा सांसदों, लोकसभा सांसदों और विधायकों से कहा है कि वे अपनी उपलब्ध निधि से मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराने में योगदान दें। अधिकारियों का मानना है कि इन पहलों से जहां लोगों में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर वन्यजीवों का मानव बस्तियों में आना भी नियंत्रित किया जा सकेगा। सरकार का लक्ष्य है कि तकनीक और संसाधनों का उपयोग कर इस संघर्ष को कम किया जाए और दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि मानव-वन्यजीव घटनाओं पर नियंत्रण के लिए पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जैसे सर्वाधिक प्रभावित जिलों में वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो क्षेत्रीय परिस्थितियों की नियमित निगरानी करेंगे और जरूरत पड़ने पर त्वरित हस्तक्षेप सुनिश्चित करेंगे। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत के अनुसार फॉक्स लाइट, वन्यजीवों को बेहोश करने वाले उपकरण, सुरक्षा किट और अन्य आधुनिक संसाधन भी मुहैया कराए जाएंगे, ताकि किसी भी आपात स्थिति में वन विभाग प्रभावी कार्रवाई कर सके। वन मंत्री उनियाल ने कहा कि घटनाओं के पीछे के कारणों का विस्तृत अध्ययन कराने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिससे भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष को वैज्ञानिक तरीके से कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में सभी आवश्यक कदम उठा रही है और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से प्रभावित क्षेत्रों में संसाधन बढ़ाए जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि अभियानों, सुरक्षा उपकरणों और वैज्ञानिक विश्लेषण की मदद से इस चुनौती पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा।

वन मंत्री ने राज्यसभा सांसदों, लोकसभा सांसदों और विधायकों से अपील की है कि वे अपनी उपलब्ध निधि में से प्रभावित वन प्रभागों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए आर्थिक सहयोग दें। उनका कहना है कि संसदीय निधि और विधायक निधि से मिलने वाली सहायता से ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा उपकरण, सोलर लाइटें, फॉक्स लाइट और अन्य संसाधन तेज़ी से उपलब्ध कराए जा सकेंगे। सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष पर उच्च स्तरीय निगरानी के लिए सर्वाधिक प्रभावित जिलों पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी में वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्णय लिया है।

ये अधिकारी लगातार हालात पर नजर रखेंगे और किसी भी घटना की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। वन मंत्री उनियाल ने कहा कि घटनाओं को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने विभाग को निर्देश दिया है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष के बढ़ने के मूल कारणों की पहचान के लिए विस्तृत अध्ययन भी कराया जाए, ताकि वैज्ञानिक आधार पर भावी रणनीति तैयार की जा सके। सरकार का मानना है कि संसाधनों की उपलब्धता, तकनीकी साधनों का इस्तेमाल और लगातार निगरानी इन तीनों की मदद से मानव-वन्यजीव संघर्ष को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

 

 

 

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