धामी कैबिनेट का बड़ा फैसला, एंटीहेल नेट पर किसानों को 75% सब्सिडी..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के पर्वतीय और बागवानी बहुल क्षेत्रों में रहने वाले किसानों के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला लिया है। अब प्रदेश में सेब सहित अन्य फल और सब्जी उत्पादकों की फसलें प्राकृतिक आपदाओं से कहीं अधिक सुरक्षित होंगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में एंटीहेल नेट पर राज्य सरकार की ओर से 25 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।अब तक एंटीहेल नेट पर केंद्र सरकार की ओर से 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती थी, लेकिन राज्य सरकार के इस निर्णय के बाद किसानों को कुल मिलाकर 75 प्रतिशत तक अनुदान का लाभ मिलेगा। इससे बागवानी करने वाले छोटे और सीमांत किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
ओलावृष्टि से होने वाले नुकसान पर लगेगी रोक
प्रदेश में हर वर्ष ओलावृष्टि, तेज हवाओं और मौसम की अनिश्चितताओं के कारण बागवानी फसलों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। विशेषकर सेब, आड़ू, प्लम, खुबानी और नाशपाती जैसी फसलें ओलावृष्टि की सबसे ज्यादा चपेट में आती हैं। एंटीहेल नेट के उपयोग से इन फसलों को ओलों की मार, तेज हवाओं और पक्षियों से होने वाले नुकसान से प्रभावी सुरक्षा मिलती है। एंटीहेल नेट एक विशेष प्रकार की मजबूत और टिकाऊ बुनी हुई प्लास्टिक जाली होती है, जिसे बागानों के ऊपर लगाया जाता है। यह न केवल फलों को टूटने और गिरने से बचाती है, बल्कि उत्पादन की गुणवत्ता को भी बनाए रखती है।
बागवानी मिशन के तहत मिलेगा अतिरिक्त लाभ
कैबिनेट में आए प्रस्ताव के अनुसार, जब तक राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना संचालित रहेगी, तब तक केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए लक्ष्यों के अनुरूप राज्य सरकार हर वर्ष 25 प्रतिशत अतिरिक्त राज्यांश के रूप में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी। इससे किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और बागवानी क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा। एंटीहेल नेट का एक बड़ा लाभ यह भी है कि यह फलों को पक्षियों द्वारा नुकसान से भी बचाता है। पर्वतीय क्षेत्रों में पक्षियों द्वारा फसल को नुकसान एक बड़ी समस्या रही है। नेट लगाने से फलों की बर्बादी कम होगी और किसानों को बेहतर उत्पादन मिलेगा। राज्य सरकार का कहना है कि इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय को सुरक्षित और स्थिर बनाना है। प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान में कमी आने से किसानों को आर्थिक संकट से राहत मिलेगी। साथ ही बागवानी क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि एंटीहेल नेट पर अतिरिक्त सब्सिडी से पर्वतीय क्षेत्रों में बागवानी को नई मजबूती मिलेगी। इससे न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण और पहाड़ी अर्थव्यवस्था को भी संबल मिलेगा।

