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अब बैटरी बनेंगी बिजली का बैंक, केंद्र से मिलेगी सब्सिडी की ताकत..

अब बैटरी बनेंगी बिजली का बैंक, केंद्र से मिलेगी सब्सिडी की ताकत..

 

उत्तराखंड:  अब बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्रोजेक्ट लगाए जाएंगे, जिनका उद्देश्य बिजली को बैटरियों में सुरक्षित रखना है ताकि जरूरत के समय उसका उपयोग किया जा सके। यह पहल राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से सब्सिडी मिलेगी। राज्य के ऊर्जा सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को पत्र भेजकर 500 मेगावाट-आवर की बैटरी स्टोरेज क्षमता के लिए आवंटन मांगा है। यह तकनीक सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न बिजली को संग्रहित करने में मदद करेगी।इससे बिजली कटौती की समस्या में कमी आएगी और राज्य की ग्रीन एनर्जी क्षमता भी बढ़ेगी। उत्तराखंड में बिजली अब बैटरी में होगी महफूज़, केंद्र से मांगी गई 500 MWh की क्षमता।

प्रदेश में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) लगाने की दिशा में काम शुरू हो चुका है। राज्य सरकार ने तीन बीईएसएस प्रोजेक्ट लगाने की डीपीआर तैयार कर ली है। इनमें से 30 मेगावाट 75 मेगावाट आवर का प्रोजेक्ट ढकरानी, देहरादून सब स्टेशन के पास बनेगा। जबकि दूसरा 15 मेगावाट व 37.5 मेगावाट आवर का प्रोजेक्ट उत्तरकाशी के तिलोथ सब स्टेशन के पास लगेगा। तीसरा 37.5 मेगावाट आवर का प्रोजेक्ट खटीमा सब स्टेशन के पास लगाया जाएगा। सचिव ऊर्जा ने राज्य को 500 मेगावाट आवर के प्रोजेक्ट आवंटन की अनुमति मांगी है। इससे वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) योजना के तहत प्रति मेगावाट आवर 18 लाख रुपये की सब्सिडी केंद्र सरकार से मिलेगी।

 

 

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