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केशव प्रयाग में पुष्कर कुंभ का शुभारंभ, सरस्वती-अलकनंदा संगम पर श्रद्धालुओं ने किया पुण्यस्नान..

केशव प्रयाग में पुष्कर कुंभ का शुभारंभ, सरस्वती-अलकनंदा संगम पर श्रद्धालुओं ने किया पुण्यस्नान..

 

 

उत्तराखंड: माणा गांव के पास स्थित केशव प्रयाग में बुधवार को पुष्कर कुंभ का विधिवत शुभारंभ हुआ। सरस्वती और अलकनंदा नदियों के दिव्य संगम पर श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर पुण्य अर्जित किया। यह संगम स्थल वह स्थान है जहां अदृश्य सरस्वती प्रकट होकर अलकनंदा से मिलती है। जिसे केशव प्रयाग कहा जाता है। इस विशेष अवसर पर लगभग 500 श्रद्धालुओं ने सरस्वती मंदिर में दर्शन कर विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की। मंत्रोच्चारण, शंखनाद और वैदिक अनुष्ठानों के बीच वातावरण में अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति हुई। बृहस्पतिवार से दक्षिण भारत के श्रद्धालुओं के जत्थे भी पुष्कर कुंभ में सम्मिलित होने के लिए पहुंचने लगे हैं। आयोजन से जुड़े संतों और स्थानीय पुजारियों ने बताया कि इस वर्ष कुंभ का विशेष महत्व है क्योंकि सरोवर, संगम और सप्तऋषियों की कथाओं से जुड़ा यह क्षेत्र अद्वितीय धार्मिक ऊर्जा का केंद्र बन चुका है। स्थानीय प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों ने श्रद्धालुओं के स्वागत और सुविधाओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं। कुंभ के दौरान सत्संग, यज्ञ, धर्म चर्चा और विविध सांस्कृतिक आयोजन भी प्रस्तावित हैं।

माणा गांव के पास स्थित केशव प्रयाग में बुधवार को पुष्कर कुंभ का शुभारंभ वैदिक रीति-रिवाजों के साथ हुआ। सुबह छह बजे से ही सरस्वती मंदिर में विशेष पूजन-अर्चनाएं शुरू हो गईं थी। आचार्यगणों ने वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ मां सरस्वती का आह्वान किया और फिर सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर दिन की शुरुआत की। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने सरस्वती और अलकनंदा नदियों के संगम पर स्थित केशव प्रयाग में आस्था की डुबकी लगाई। इस अवसर पर केवल तीर्थ यात्री ही नहीं, बल्कि स्थानीय निवासी भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और आयोजन का हिस्सा बने।

प्रधान पीतांबर मोल्फा का कहना हैं कि दक्षिण भारत में पुष्कर कुंभ का विशेष महातम्य है और वहां के श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन एक पवित्र संकल्प की तरह होता है। उत्तराखंड की धरती पर इसका आयोजन आस्था की एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गुरुवार से दक्षिण भारत से श्रद्धालुओं के जत्थे पहुंचने लगेंगे और केशव प्रयाग की दिव्यता और ऐतिहासिकता से जुड़ेंगे। यहां विशेष धार्मिक अनुष्ठानों, कथा प्रवचनों और सांस्कृतिक आयोजनों की भी श्रृंखला प्रस्तावित है। इस आयोजन के माध्यम से माणा गांव और केशव प्रयाग एक बार फिर भारत की आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक समरसता के प्रतीक बनकर उभरे हैं। यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु केशव प्रयाग में स्नान के लिए पहुंचते हैं। विजयवाड़ा, हैदराबाद और राजमुंदरी से पहुंचे श्रद्धालु शिव शेखर सरमा, दुर्गा सरमा, सुरेश, धनंजय, देवकी नंदन, काशी विश्वनाथ सरमा आदि का कहना है कि वे पुष्कर कुंभ के लिए माणा गांव पहुंचे। बदरीनाथ धाम के दर्शनों के बाद केशव प्रयाग में स्नान किया। उन्होंने कहा कि यहां बिताया एक-एक पल अभिभूत करने वाले हैं। दिनभर सरस्वती मंदिर में पूजाएं हुईं।

 

 

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