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उत्तराखंड के हर जिले में विकसित होंगी पैराग्लाइडिंग सुविधाएं, पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल..

उत्तराखंड के हर जिले में विकसित होंगी पैराग्लाइडिंग सुविधाएं, पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने घोषणा की है कि प्रदेश के हर जिले में पैराग्लाइडिंग की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य रोमांचक खेलों के प्रति रुचि रखने वाले युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर देना है। पर्यटन सचिव ने कहा कि भीमताल में पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षण को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। यहां 20 से 25 बिस्तरों वाला छात्रावास तैयार किया जाएगा, जहां पूरे वर्षभर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। धीराज गर्ब्याल ने कहा कि यह योजना न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने में मददगार होगी, बल्कि उत्तराखंड को साहसिक पर्यटन की दिशा में एक प्रमुख गंतव्य बनाने में भी सहायक सिद्ध होगी। सरकार द्वारा इस परियोजना के लिए बुनियादी ढांचे, सुरक्षा मानकों और विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। पर्यटन विभाग के अनुसार इस योजना को चरणबद्ध तरीके से सभी जिलों में लागू किया जाएगा।

बृहस्पतिवार को पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने साहसिक पर्यटन को लेकर अहम बैठक की। बैठक में उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब तक 141 प्रशिक्षुओं को पैराग्लाइडिंग पायलट के रूप में टेंडम फ्लाइट और क्रॉस कंट्री प्रशिक्षण दिया जा चुका है। पर्यटन सचिव ने कहा कि इन प्रशिक्षुओं को अब अगले स्तर पर ले जाने के लिए आगामी छह महीनों में भीमताल और चंपावत में उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस प्रशिक्षण के तहत उन्हें अधिक जटिल उड़ानों, तकनीकी ज्ञान और सुरक्षा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नई टेंडम पैराग्लाइडर्स की खरीद की जाए ताकि प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए उच्च गुणवत्ता वाले संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें। इससे प्रशिक्षुओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उड़ान कौशल विकसित करने में मदद मिलेगी। धीराज गर्ब्याल ने कहा कि हमारा लक्ष्य उत्तराखंड को साहसिक पर्यटन की राजधानी बनाना है। इसके लिए स्थानीय युवाओं को दक्ष बनाना जरूरी है, जिससे न केवल उन्हें रोजगार मिलेगा बल्कि पर्यटन उद्योग को भी मजबूती मिलेगी। उत्तराखंड में नैनीताल, टिहरी, पिथौरागढ़, और चंपावत जैसे क्षेत्रों में पैराग्लाइडिंग के लिए अनुकूल प्राकृतिक भू-आकृति मौजूद है। इन क्षेत्रों को अब पेशेवर प्रशिक्षण और सुरक्षित उड़ानों के लिए विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने प्रदेश में पैराग्लाइडिंग गतिविधियों के विस्तार और तकनीकी सशक्तिकरण को लेकर कई अहम निर्देश दिए।पर्यटन सचिव ने कहा कि वर्तमान में पैराग्लाइडिंग की गतिविधियां मुख्य रूप से भीमताल और टिहरी क्षेत्रों तक सीमित हैं। लेकिन अब सरकार का लक्ष्य है कि इसे राज्य के प्रत्येक जिले तक विस्तारित किया जाए।उन्होंने कहा कि पौड़ी जिले की नयार घाटी, चंपावत के लोहाघाट, उत्तरकाशी के मोरी, नैनीताल के कोटाबाग और बागेश्वर सहित अन्य जिलों में पैराग्लाइडिंग के लिए उपयुक्त स्थलों की पहचान की जा चुकी है। अब इन जगहों पर टेक-ऑफ और लैंडिंग जोन चिह्नित कर बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा। धीराज गर्ब्याल ने स्पष्ट किया कि साहसिक पर्यटन से स्थानीय युवाओं को रोजगार के बड़े अवसर मिलेंगे। इसके तहत पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षुओं को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित कर उन्हें पायलट, तकनीशियन और सहायक के रूप में कार्य करने के अवसर दिए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के लिए एक डिजिटल मोबाइल एप्लिकेशन विकसित करने के निर्देश भी दिए। यह एप प्रशिक्षण की प्रक्रिया, पंजीकरण, मॉनिटरिंग, प्रशिक्षक प्रोफाइल और सुरक्षा मानकों से जुड़ी सभी जानकारियां एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराएगा। पर्यटन सचिव ने बैठक में बताया कि अब तक 141 प्रशिक्षुओं को टेंडम फ्लाइट और क्रॉस कंट्री पैराग्लाइडिंग का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इन्हें अगले छह महीनों में भीमताल और चंपावत में उन्नत प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। सरकार ने इस उद्देश्य के लिए नए टेंडम पैराग्लाइडर्स खरीदने की मंजूरी भी दे दी है, जिससे प्रशिक्षुओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जा सके।

 

 

 

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