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Fri. Jan 23rd, 2026

राजस्व प्रबंधन में उत्तराखंड अव्वल, आय बढ़ी डेढ़ गुना और 6 साल से सरप्लस जारी..

राजस्व प्रबंधन में उत्तराखंड अव्वल, आय बढ़ी डेढ़ गुना और 6 साल से सरप्लस जारी..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड ने जब से अपने स्वयं के संसाधनों से आय बढ़ाने और अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं, राज्य की वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। नतीजतन वार्षिक बजट में लंबे समय से चला आ रहा राजस्व घाटा अब सिमट कर राजस्व सरप्लस में बदल गया है। वित्तीय अनुशासन और संसाधन जुटाने की इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि प्रदेश पिछले लगातार छह वर्षों से राजस्व सरप्लस बना हुआ है। यह उपलब्धि उत्तराखंड को वित्तीय स्थिरता की नई दिशा दे रही है। आंकड़ों के अनुसार बीते पांच वर्षों में राज्य की कर और गैर-कर मदों से होने वाली आय डेढ़ गुना से अधिक बढ़ी है।

राज्य सरकार ने न केवल कर संग्रह क्षमता में सुधार किया है, बल्कि पर्यटन, उद्योग और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से भी आय के नए स्रोत विकसित किए हैं। सीएम पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई वाली सरकार ने वित्तीय प्रबंधन को अपनी प्राथमिकता बनाया है। खर्च पर नियंत्रण और पारदर्शी कार्यप्रणाली के जरिए सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि हर एक रुपये का सदुपयोग हो। अब सरकार का लक्ष्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत व आत्मनिर्भर बनाना है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस रफ्तार से चलते हुए उत्तराखंड आने वाले वर्षों में विकास योजनाओं के लिए न केवल अपने संसाधनों पर निर्भर रह सकेगा, बल्कि निवेश आकर्षित कर राज्य को आर्थिक रूप से सशक्त भी बनाएगा।

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने वित्तीय वर्ष 2013-14 से 2022-23 तक की अवधि के लिए राज्यों की वित्तीय स्थिति पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में उत्तराखंड उन 16 राज्यों की सूची में शामिल है, जो राजस्व सरप्लस की स्थिति में हैं। रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड ने बीते दस वर्षों में लगातार वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है। खासकर पिछले चार वर्षों से प्रदेश ने हर साल राजस्व सरप्लस बजट प्रस्तुत किया है। यानी राज्य अपने कुल संसाधनों से जितना राजस्व अर्जित कर रहा है, उसी सीमा में या उससे कम खर्च कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के पुनरीक्षित बजट अनुमान भी यही संकेत देते हैं कि राज्य इस अवधि में भी राजस्व सरप्लस दर्ज करेगा। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान में भी यही स्थिति आकलित की गई है।

इस स्थिरता का श्रेय राज्य सरकार की संसाधन जुटाने की रणनीति और अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाने के प्रयासों को दिया जा रहा है। कर संग्रह क्षमता में सुधार और पर्यटन, उद्योग व प्राकृतिक संसाधनों से आय के नए स्रोत तलाशने के कारण प्रदेश ने राजस्व घाटे से उबर कर मजबूती हासिल की है। हालांकि कैग ने अपनी रिपोर्ट में एक गंभीर मुद्दा भी उठाया है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2005 के बाद से अब तक करीब 47 हजार करोड़ रुपये की बजट राशि बिना निर्धारित प्रक्रिया अपनाए खर्च की गई है। यह तथ्य वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि उत्तराखंड अपने वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखता है, तो आने वाले वर्षों में राज्य न केवल आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ेगा, बल्कि निवेश आकर्षित कर आर्थिक रूप से और भी सशक्त बनेगा। हालांकि, कैग की आपत्तियों का समाधान और बजट प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करना राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। सीएम धामी का कहना हैं कि प्रदेश सरकार वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता दे रही है। आय के संसाधन में वृद्धि के लिए लगातार प्रयास करने से राजस्व को लेकर विभागों में उत्साह बढ़ा है। इसके और बेहतर परिणाम दिखाई देंगे।

 

 

 

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