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देहरादून में ऑटोमेटेड पार्किंग प्रोजेक्ट की शुरुआत, सीएम धामी के विज़न पर ‘फ्री सखी कैब’ सेवा से ट्रैफिक समाधान को नई दिशा..

देहरादून में ऑटोमेटेड पार्किंग प्रोजेक्ट की शुरुआत, सीएम धामी के विज़न पर ‘फ्री सखी कैब’ सेवा से ट्रैफिक समाधान को नई दिशा..

 

 

 

उत्तराखंड: सीएम सिंह धामी के मार्गदर्शन और जिला प्रशासन देहरादून की नवाचारपूर्ण पहल से राजधानी देहरादून में ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था को लेकर एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हुई है। सीएम धामी के “स्मार्ट और सक्षम उत्तराखण्ड” विज़न को साकार करते हुए जिला प्रशासन ने ऑटोमेटेड पार्किंग प्रोजेक्ट के तहत ‘फ्री सखी कैब’ सेवा को जनता को समर्पित किया है। यह पहल न केवल शहर के यातायात प्रबंधन को आधुनिक बनाएगी, बल्कि पार्किंग व्यवस्था को भी सुव्यवस्थित और तकनीकी रूप से सशक्त करेगी।

‘फ्री सखी कैब’ सेवा खासतौर पर महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा के लिए शुरू की गई है, ताकि उन्हें पार्किंग जोन से अपने गंतव्य तक सुरक्षित और आसान आवागमन मिल सके। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि यह सेवा ऑटोमेटेड मल्टी-लेवल पार्किंग सिस्टम का हिस्सा है, जो आने वाले समय में देहरादून के विभिन्न क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इस सेवा से शहर में वाहन जाम की समस्या में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। सीएम धामी ने इस अवसर पर कहा कि देहरादून सहित पूरे उत्तराखंड को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करना हमारा लक्ष्य है। आधुनिक तकनीक आधारित व्यवस्थाएं जनता के जीवन को आसान बनाएंगी और शहरों को व्यवस्थित रूप से विकसित करेंगी। ‘फ्री सखी कैब’ सेवा की शुरुआत को नागरिकों ने भी सराहा है। यह पहल राज्य में महिला सशक्तिकरण, स्मार्ट ट्रांसपोर्ट और सुगम शहरी यातायात के संगम के रूप में देखी जा रही है।

यह सेवा परेड ग्राउंड से शुरू की गई है। शुरुआत में दो ईवी वाहन महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं, जो पार्किंग से नजदीकी बाजारों और मुख्य स्थलों तक निःशुल्क शटल सुविधा प्रदान करेंगे। जल्द ही इस सेवा में छह और वाहन जोड़े जाएंगे, जिससे आम नागरिकों को सुगम और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। कार्यक्रम के दौरान विधायक खजानदास, महापौर सौरभ थपलियाल, जिलाधिकारी सविन बंसल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने हरी झंडी दिखाकर वाहनों को रवाना किया। जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि मुख्यमंत्री धामी के विज़न के अनुरूप यह प्रोजेक्ट महिलाओं की आजीविका, ट्रैफिक समाधान और तकनीकी दक्षता का अनोखा संगम है।

उन्होंने कहा कि ऑटोमेटेड पार्किंग प्रणाली पारंपरिक पार्किंग की तुलना में तीन गुना सस्ती है और इससे समय की बचत भी होती है। डीएम बंसल ने यह भी कहा कि यह पहल न केवल शहरी यातायात प्रबंधन को मजबूत करेगी, बल्कि महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण को भी नई दिशा देगी। ‘फ्री सखी कैब’ सेवा के जरिए महिला स्वयं सहायता समूहों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे, जो राज्य सरकार की आत्मनिर्भरता की नीति के अनुरूप है। देहरादून में इस प्रोजेक्ट की शुरुआत को “स्मार्ट सिटी” और “ग्रीन मोबिलिटी” मिशन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

 

वर्तमान में देहरादून में तीन आधुनिक ऑटोमेटेड पार्किंग सुविधाएँ परेड ग्राउंड, तिब्बती मार्केट और कोरोनेशन हॉस्पिटल के पास शुरू की जा चुकी हैं। इनकी कुल क्षमता 261 वाहनों की है, जिससे शहर के प्रमुख व्यावसायिक इलाकों में पार्किंग की समस्या में उल्लेखनीय कमी आई है। यह पूरी परियोजना कृष्णा महिला स्वयं सहायता समूह के माध्यम से संचालित की जा रही है। प्रशासन के अनुसार, इन पार्किंग स्थलों से प्रतिदिन लगभग ₹29,000 की आय हो रही है, जो अब ‘फ्री सखी कैब सेवा’ के जुड़ने से और बढ़ेगी। यह पहल न केवल महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ा रही है, बल्कि पर्यावरण-अनुकूल शहरी परिवहन को भी नया आयाम दे रही है।

‘फ्री सखी कैब सेवा’ के तहत महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्याएं ईवी (इलेक्ट्रिक) वाहनों का संचालन कर रही हैं। ये कैब्स परेड ग्राउंड पार्किंग से नजदीकी बाजारों और मुख्य स्थलों तक नागरिकों को निःशुल्क शटल सुविधा प्रदान करती हैं। जल्द ही इस सेवा में छह और वाहन जोड़े जाएंगे। सीएम धामी की प्राथमिकता के अनुरूप, जिला प्रशासन ने सड़क किनारे अवैध पार्किंग हटाने और ट्रैफिक अनुशासन सुदृढ़ करने के लिए विशेष अभियान भी शुरू किया है। इससे शहर की सड़कों पर अव्यवस्था कम होगी और नागरिकों को बेहतर यातायात अनुभव मिलेगा। देहरादून में शुरू हुई यह स्मार्ट पार्किंग और शटल सेवा अब राज्य के अन्य नगरों के लिए मॉडल प्रोजेक्ट के रूप में देखी जा रही है। प्रशासन का लक्ष्य आने वाले समय में शहर के सभी प्रमुख स्थलों को इस सुविधा से जोड़ने का है, जिससे देहरादून वास्तव में एक स्मार्ट, सुव्यवस्थित और सशक्त शहर के रूप में विकसित हो सके।

 

 

 

 

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