मानव-वन्यजीव संघर्ष पर बड़ी राहत, मृतक आश्रितों को अब मिलेंगे 10 लाख रुपये..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में इन दिनों मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। खासकर भालू और गुलदार के हमलों ने पहाड़ी इलाकों में दहशत का माहौल बना दिया है। पिछले कुछ समय में कई लोग इन हमलों का शिकार होकर अपनी जान गंवा चुके हैं। लगातार बढ़ती घटनाओं ने न सिर्फ स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ाई है बल्कि वन विभाग और सरकार के लिए भी यह गंभीर चुनौती बनकर उभरी है। इसी सिलसिले में बुधवार को आयोजित धामी कैबिनेट बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। बैठक में ‘मानव वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निधि नियमावली 2025 (संशोधन)’ को मंजूरी दे दी गई है। संशोधन के तहत अब यदि किसी व्यक्ति की मौत वन्यजीव हमले में होती है तो उसके परिजनों को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।सरकार के इस फैसले को प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। इससे उन परिवारों को सहायता मिलेगी जो वन्यजीव हमलों के चलते अपनों को खो देते हैं। साथ ही राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों के इलाज का संपूर्ण खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा, ताकि पीड़ितों को आर्थिक दबाव से न गुजरना पड़े। इस निर्णय से उम्मीद है कि वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित परिवारों को बेहतर सहायता मिलेगी और राज्य में वन विभाग की जिम्मेदारियों को भी मजबूत आधार मिलेगा।
वर्तमान में प्रभावितों को अनुग्रह राशि का भुगतान “मानव वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निधि नियमावली–2024” के अनुसार किया जाता है। इस नियमावली के तहत मानव मृत्यु की स्थिति में मृतक आश्रितों को 6 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती थी। लंबे समय से इस राशि को बढ़ाने की मांग उठ रही थी, क्योंकि भालू और गुलदार जैसे वन्यजीवों के हमलों में कई लोग अपनी जान गंवा रहे हैं और पीड़ित परिवार आर्थिक संकट से जूझते हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए बुधवार, 26 नवंबर को आयोजित धामी कैबिनेट बैठक में बड़ा निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने सहायता राशि बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए मृतक के परिजनों को दी जाने वाली राहत राशि को 6 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया है। सरकार के इस निर्णय से प्रभावित परिवारों को अधिक सहारा मिलेगा। साथ ही यह कदम राज्य में बढ़ते वन्यजीव संघर्ष के मामलों को गंभीरता से लेने और पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
भालू और गुलदार के हमलों से होने वाली जनहानि के मामलों में सहायता राशि बढ़ाने की लंबे समय से उठ रही मांग को अब सरकार ने पूरा कर दिया है। सीएम धामी पहले ही वन्यजीव हमलों में जनहानि पर मिलने वाली सहायता राशि को 10 लाख रुपये करने की घोषणा कर चुके थे। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए मानव–वन्यजीव संघर्ष में मृतकों के परिजनों को मिलने वाली राहत राशि बढ़ाने पर राज्य स्तर पर भी समीक्षा की गई। इसी विषय को ध्यान में रखते हुए टाइगर कन्जर्वेशन फाउंडेशन फॉर सीटीआर की शासी निकाय की 10वीं बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया था। बैठक में यह तय किया गया कि मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में मानव मृत्यु पर अनुग्रह राशि को 6 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये किया जाए। इसके लिए नियमावली के नियम 9, उपनियम (1) में संशोधन प्रस्तावित था। बुधवार को हुई धामी कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर औपचारिक मुहर लगा दी गई, जिसके बाद अब राज्य में वन्यजीव हमलों में मृतकों के आश्रितों को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
सरकार के इस निर्णय को पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जहां पिछले कुछ समय से वन्यजीव हमलों की घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है। यह कदम न सिर्फ पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहारा देगा बल्कि राज्य में मानव–वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन को अधिक संवेदनशील और मजबूत बनाने में भी मदद करेगा। ऐसे में वन विभाग कि इस प्रस्ताव पर मंत्रिमंडल ने मुहर लगा दी है, जिसके तहत अब मानव मृत्यु की दशा में प्रति व्यक्ति दस लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी जायेगी। इसके साथ ही वर्तमान समय में मानव वन्य जीव संघर्ष के दौरान घायलों को दो लाख रुपए की सहायता राशि दी जाती है, जिसको देखते हुए हाल ही में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस बाबत घोषणा किया है कि मानव वन्यजीव संघर्ष के दौरान घायल होने वाले लोगों के इलाज का सारा खर्च उत्तराखंड सरकार वहन करेगी। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई शासनादेश जारी नहीं हुआ है।

