Breaking
Fri. Jan 23rd, 2026

बधाणीताल के सौंदर्यीकरण से पर्यटन को बढ़ावा, डीएम ने बताया लक्ष्य..

बधाणीताल के सौंदर्यीकरण से पर्यटन को बढ़ावा, डीएम ने बताया लक्ष्य..

 

 

 

उत्तराखंड: रुद्रप्रयाग जिले के जखोली विकासखंड स्थित प्रसिद्ध बधाणीताल के सौंदर्यीकरण एवं पर्यटन विकास के लिए 3 करोड़ 36 लाख रुपये की लागत से विकास कार्य किए जाएंगे। ये कार्य राज्य सेक्टर के अंतर्गत पर्यटन विकास हेतु अवस्थापना निर्माण योजना के तहत कराए जा रहे हैं। मंगलवार को इन विकास कार्यों का विधिवत शिलान्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया। शिलान्यास कार्यक्रम में जिलाधिकारी प्रतीक जैन, विधायक रुद्रप्रयाग भरत चौधरी और जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत ने संयुक्त रूप से विकास कार्यों का शुभारंभ किया। कार्यक्रम से पूर्व स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया। शिलान्यास अवसर पर विधिविधान से पूजा-अर्चना कर विकास कार्यों की शुरुआत की गई।

प्रस्तावित कार्यों के अंतर्गत ग्लास हाउस, कैफेट एरिया, रैलिंग एवं फुटपाथ निर्माण, बहुउद्देशीय मंच तथा ताल का सौंदर्यीकरण शामिल है। इन कार्यों के पूर्ण होने के बाद बधाणीताल को एक आकर्षक और सुव्यवस्थित पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इन सभी कार्यों की कार्यदायी संस्था ग्रामीण निर्माण विभाग, रुद्रप्रयाग को बनाया गया है। कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी प्रतीक जैन, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों ने स्थानीय मातृशक्ति के साथ बधाणीताल की परिक्रमा भी की। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि बधाणीताल का विकास न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा। साथ ही कार्यक्रम के माध्यम से धार्मिक आस्था, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का भी संदेश दिया गया। स्थानीय लोगों ने बधाणीताल के विकास को क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक कदम बताते हुए राज्य सरकार और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया।

बधाणीताल सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्यों के शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने कहा कि बधाणीताल प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण क्षेत्र है, जहां पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का निरंतर प्रयास है कि जनपद के दूरस्थ एवं प्राकृतिक स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर सुदृढ़ पहचान दिलाई जाए, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। जिलाधिकारी ने बधाणीताल के प्राकृतिक सौंदर्य की सराहना करते हुए कहा कि यहां का शांत वातावरण, जलस्रोत और हरियाली इसे एक विशिष्ट पर्यटन स्थल बनाते हैं। उन्होंने पर्यटन संवर्धन की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि योजनाबद्ध विकास से बधाणीताल जैसे स्थलों को राज्य और देश स्तर पर पहचान दिलाई जाएगी।

प्रतीक जैन ने कहा कि बधाणीताल क्षेत्र का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी अत्यंत प्राचीन और विशिष्ट है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यटन विकास के साथ-साथ क्षेत्र की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का संरक्षण जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए बधाणीताल में मछलियों को दाना खिलाया और लोगों से ताल, आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ एवं संरक्षित बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के बिना पर्यटन का सतत विकास संभव नहीं है।जिलाधिकारी ने कहा कि बधाणीताल को केंद्र में रखकर पूरे बांगर क्षेत्र को पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित करना जिला प्रशासन का लक्ष्य है। इससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी और स्थानीय समुदाय को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

बधाणीताल जिसे स्थानीय लोग विष्णु ताल के नाम से भी जानते हैं, पौराणिक कथाओं और धार्मिक आस्थाओं से समृद्ध एक महत्वपूर्ण स्थल है। यह झील न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता, बल्कि गहरी धार्मिक मान्यताओं के कारण भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच विशेष पहचान रखती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार त्रियुगीनारायण में भगवान शिव और देवी पार्वती के दिव्य विवाह के समय बधाणीताल का निर्माण हुआ था। स्थानीय लोककथाओं में कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने इस पावन अवसर को पवित्र करने के लिए अपनी नाभि से जल प्रवाहित कर इस झील का निर्माण किया, इसी कारण इसे विष्णु ताल कहा जाता है।

बधाणीताल (बधाणी झील) उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है और यह समुद्र तल से करीब 7,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। झील अपनी रंग-बिरंगी मछलियों, शांत वातावरण और हरियाली के लिए भी जानी जाती है, जो इसे एक आकर्षक पर्यटन स्थल बनाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, बधाणीताल में स्नान और दर्शन करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। हर वर्ष बैसाखी पर्व के अवसर पर यहां एक स्थानीय मेला भी आयोजित किया जाता है, जिसमें दूर-दराज से श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का यह अनूठा संगम बधाणीताल को न केवल आस्था का केंद्र बनाता है, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी इसे विशेष महत्व प्रदान करता है। प्रशासन द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों से आने वाले समय में यह स्थल राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल होने की उम्मीद है।

 

 

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *