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कालाढूंगी के पत्तापानी गांव में गन्ने के खेत से मादा गुलदार का शव बरामद, वन विभाग जांच में जुटा..

कालाढूंगी के पत्तापानी गांव में गन्ने के खेत से मादा गुलदार का शव बरामद, वन विभाग जांच में जुटा..

 

 

 

उत्तराखंड: नैनीताल जिला कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और आसपास के घने वन क्षेत्रों के कारण वन्यजीवों की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। इस क्षेत्र में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। बाघ, गुलदार और हाथियों की आवाजाही के चलते ग्रामीण इलाकों में डर का माहौल बना रहता है। इसी बीच कालाढूंगी क्षेत्र से एक चिंताजनक मामला सामने आया है। कालाढूंगी के पत्तापानी गांव में गन्ने के खेत से एक मादा गुलदार का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों ने जब खेत में गुलदार का शव पड़ा देखा तो तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही तराई पश्चिमी वन प्रभाग, रामनगर के अंतर्गत बैलपड़ाव रेंज की वन विभाग टीम मौके पर पहुंची और क्षेत्र को घेरते हुए जांच शुरू की। वन विभाग को ग्रामीणों ने कहा कि बीते कुछ दिनों से गांव के आसपास गुलदार की मौजूदगी महसूस की जा रही थी और रात के समय गुर्राने की आवाजें भी सुनाई दे रही थीं। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर विभाग ने पहले ही क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी थी। इसी दौरान गश्त कर रही टीम को गन्ने के खेत में गुलदार का शव मिला।

मौके पर जांच के दौरान पता चला कि मृत गुलदार करीब आठ वर्ष की मादा है। उसके शरीर पर कई गहरे घाव और चोट के निशान पाए गए हैं। इन निशानों को देखकर प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि गुलदार की मौत किसी अन्य वन्यजीव के साथ आपसी संघर्ष के कारण हुई हो सकती है। हालांकि वन विभाग का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही की जा सकेगी। वन विभाग की टीम ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इसके साथ ही आसपास के क्षेत्रों में निगरानी और गश्त बढ़ा दी गई है, ताकि किसी अन्य वन्यजीव की गतिविधि से ग्रामीणों को कोई खतरा न हो।

इस घटना के बाद पत्तापानी गांव सहित आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। वन विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने, रात के समय अकेले बाहर न निकलने और खेतों की ओर समूह में जाने की अपील की है। विभाग ने यह भी भरोसा दिलाया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल वन विभाग की टीमें लगातार क्षेत्र में निगरानी बनाए हुए हैं और ग्रामीणों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।

 

 

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