राष्ट्रीय प्रवासी दिवस पर रिवर्स पलायन की तस्वीर, स्वरोजगार से बदली प्रवासियों की तकदीर..
उत्तराखंड: रोजगार और कारोबार की तलाश में वर्षों पहले गांव छोड़कर देश-विदेश में बसे प्रवासी उत्तराखंडी अब वापस लौटकर अपने गांवों में नई उम्मीद की किरण जगा रहे हैं। रिवर्स पलायन की यह प्रक्रिया न केवल गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रही है। प्रवासियों ने अपने अनुभव और कौशल के आधार पर स्वरोजगार को अपनाते हुए गांवों में सफल आजीविका मॉडल खड़े किए हैं। उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग की रिवर्स पलायन रिपोर्ट–2025 के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में राज्य के सभी 13 जिलों में कुल 6282 प्रवासी अपने पैतृक गांवों में लौटे हैं। इनमें 169 प्रवासी विदेशों से वापस आए हैं, जबकि 4769 प्रवासी देश के विभिन्न राज्यों और 1127 प्रवासी प्रदेश के अन्य जिलों से अपने गांव लौटे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, विदेशों से लौटने वाले प्रवासियों में सबसे अधिक संख्या टिहरी जिले की है।
विदेशों और महानगरों में काम कर चुके इन प्रवासियों के पास रोजगार और कारोबार का व्यापक अनुभव रहा है। गांव लौटने के बाद उन्होंने राज्य सरकार की स्वरोजगार योजनाओं का लाभ उठाकर अपने अनुभव के अनुसार आर्थिक गतिविधियां शुरू कीं। आंकड़ों के अनुसार, रिवर्स पलायन करने वाले 39 प्रतिशत प्रवासियों ने कृषि और बागवानी के क्षेत्र में व्यवसाय शुरू किया है। वहीं 21 प्रतिशत ने पर्यटन गतिविधियों और होम स्टे व्यवसाय को अपनाया है। इसके अलावा 18 प्रतिशत प्रवासियों ने पशुपालन, जबकि करीब छह प्रतिशत ने दुकान, रेस्टोरेंट और मसाला उद्योग जैसे छोटे व्यवसायों में कदम रखा है। इन प्रवासियों की सफलता अब गांवों में अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। स्वरोजगार से न केवल उनकी आजीविका सुदृढ़ हुई है, बल्कि स्थानीय युवाओं को भी गांव में ही रोजगार के अवसर मिलने लगे हैं। कई क्षेत्रों में प्रवासी आधुनिक तकनीक और मार्केटिंग के जरिए स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ रहे हैं। उत्तरकाशी जिले में प्रवासी मोटे अनाजों की ऑनलाइन मार्केटिंग कर रहे हैं, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं।
हर जिले में होगी प्रवासी पंचायत..
रिवर्स पलायन को और अधिक प्रोत्साहित करने के लिए सीएम पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के प्रत्येक जिले में प्रवासी पंचायत आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग द्वारा एक विशेष कार्य योजना तैयार की जा रही है। इन प्रवासी पंचायतों में गांव लौटे प्रवासियों की सफल कहानियों, उनके अनुभवों और समस्याओं पर चर्चा की जाएगी, ताकि अन्य प्रवासियों को भी गांव लौटने के लिए प्रेरित किया जा सके। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि रिवर्स पलायन से गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं और आने वाले वर्षों में इसके और सकारात्मक परिणाम सामने आने की उम्मीद है। प्रवासी उत्तराखंडी अब केवल गांव लौटने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने अनुभव और नवाचार से पहाड़ की आर्थिकी को नई दिशा दे रहे हैं।

