मनरेगा बदलाव पर कांग्रेस का विरोध, 10 जनवरी से प्रदेशव्यापी आंदोलन..
उत्तराखंड: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में प्रस्तावित बदलाव और उसकी जगह विकसित भारत जी राम जी ग्रामीण अधिनियम लागू किए जाने के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने उत्तराखंड में व्यापक जनआंदोलन छेड़ने का फैसला किया है। यह आंदोलन 10 जनवरी से प्रदेशभर में चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। राजधानी देहरादून के राजपुर रोड स्थित एक होटल में आयोजित राजनीतिक मामले समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा ने की। बैठक में मनरेगा को लेकर केंद्र सरकार के फैसलों पर गंभीर चर्चा हुई और इसे ग्रामीण हितों के खिलाफ बताया गया।
कुमारी सैलजा ने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने पूरे देश में मनरेगा में किए गए बदलावों के विरोध में आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है। इसी कड़ी में उत्तराखंड में भी सुनियोजित और संगठित तरीके से आंदोलन किया जाएगा, ताकि ग्रामीणों, मजदूरों और पंचायत प्रतिनिधियों को नए अधिनियम की वास्तविकता से अवगत कराया जा सके। उन्होंने बताया कि आंदोलन की शुरुआत 10 जनवरी को सभी जिलों में प्रेस वार्ता के माध्यम से की जाएगी, जिसमें मनरेगा की जगह लागू किए जा रहे विकसित भारत जी राम जी ग्रामीण अधिनियम के प्रावधानों और उसके प्रभावों को जनता के सामने रखा जाएगा। 11 जनवरी को जिला स्तर पर महात्मा गांधी या डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष अनशन किया जाएगा। आंदोलन के अगले चरण में 29 जनवरी को पंचायत स्तर पर चौपालों का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पत्र पंचायत प्रतिनिधियों को सौंपे जाएंगे। 30 जनवरी को वार्ड स्तर पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा, जबकि 31 जनवरी से 6 फरवरी तक सभी जिला मुख्यालयों में ‘मनरेगा बचाओ धरना’ आयोजित किया जाएगा।
इसके बाद 7 फरवरी से 15 फरवरी के बीच विधानसभा घेराव कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया है, जिसके माध्यम से सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार की गई है। कांग्रेस प्रभारी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी सरकार मनरेगा की मूल भावना और आत्मा को समाप्त करना चाहती है। उन्होंने कहा कि मनरेगा एक मांग आधारित रोजगार का अधिकार था, जिसमें सरकार को काम उपलब्ध कराना अनिवार्य था। लेकिन नया अधिनियम इसे आपूर्ति आधारित योजना में बदल देता है, जिसमें काम की उपलब्धता केंद्र सरकार के बजट और तय मापदंडों पर निर्भर होगी। उन्होंने आशंका जताई कि नए कानून के प्रावधानों से ग्रामीणों का रोजगार का संवैधानिक अधिकार कमजोर होगा और राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ेगा। कांग्रेस का दावा है कि यह बदलाव गरीब, मजदूर और ग्रामीण समुदाय के हितों के खिलाफ है। बैठक में मौजूद पार्टी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि जब तक मनरेगा की मूल संरचना और अधिकार आधारित स्वरूप को सुरक्षित नहीं किया जाता, तब तक कांग्रेस का यह आंदोलन जारी रहेगा।

