बीपीएल सूची में गड़बड़ी, उत्तराखंड के इस जिले में आयकरदाता भी ले रहे लाभ..
उत्तराखंड: गरीबी रेखा से ऊपर जीवन यापन करने के बावजूद बीपीएल राशन कार्ड का लाभ ले रहे परिवारों पर अब प्रशासन सख्त रुख अपनाने जा रहा है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जो लोग पात्रता की श्रेणी में नहीं आते, उन्हें अपना बीपीएल कार्ड स्वेच्छा से सरेंडर करना होगा। इसके साथ ही ऐसे मामलों की गहन जांच के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रशासन का साफ कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक ही पहुंचना चाहिए। मंगलवार को कलेक्ट्रेट में चंपावत के कठियानौला, सिलिंगटाक, अमोड़ी सहित अन्य गांवों के प्रधानों ने जिलाधिकारी मनीष कुमार से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में ग्राम प्रधानों ने शिकायत की कि कई विभागीय योजनाओं और बैठकों की जानकारी उन्हें समय पर नहीं मिल पा रही है। इसके साथ ही उन्होंने भू-कटाव की समस्या और कृषि भूमि की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। प्रधानों ने मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा दीवार का निर्माण कराया जाए, क्योंकि दीवार न होने से किसानों की भूमि को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है।
ग्राम प्रधानों ने यह मुद्दा भी उठाया कि कई गांवों में ऐसे लोग बीपीएल कार्ड धारक बने हुए हैं, जिनके परिवार के सदस्य सरकारी सेवा में कार्यरत हैं या निजी व्यवसाय से अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। कुछ लाभार्थी आयकरदाता भी हैं, इसके बावजूद उनके पास बीपीएल कार्ड मौजूद हैं। प्रधानों ने मांग की कि ऐसे अपात्र लाभार्थियों के राशन कार्ड निरस्त कर वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को आवंटित किए जाएं। इस पर जिलाधिकारी मनीष कुमार ने स्पष्ट कहा कि जो भी लोग अपात्र श्रेणी में आते हैं, वे स्वयं अपना राशन कार्ड सरेंडर करें। इसके लिए जल्द ही औपचारिक आदेश जारी किया जाएगा। साथ ही प्रशासन की ओर से जांच भी कराई जाएगी और यदि कोई व्यक्ति गलत तरीके से लाभ लेते पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वहीं ग्राम प्रधानों द्वारा योजनाओं और बैठकों की जानकारी न मिलने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने कहा कि वर्तमान समय में प्रशासन से जुड़ी सभी सूचनाएं इंटरनेट मीडिया पर नियमित रूप से साझा की जा रही हैं। उन्होंने प्रधानों को सलाह दी कि मनोरंजन से जुड़े वीडियो देखने के बजाय चंपावत प्रशासन के आधिकारिक पेज और पोस्ट देखें, जहां सभी संचालित सरकारी योजनाओं, बैठकों और सूचनाओं से संबंधित जानकारी और पुस्तिकाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। प्रशासन का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाना और उनका लाभ सही पात्रों तक पहुंचाना है।

