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दुनियाभर के शोधकर्ता जुटे IIT रुड़की में, सीमापार जल सहयोग रहेगा मुख्य फोकस..

दुनियाभर के शोधकर्ता जुटे IIT रुड़की में, सीमापार जल सहयोग रहेगा मुख्य फोकस..

 

 

 

 

उत्तराखंड: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की में 23 से 25 फरवरी 2026 तक चौथे ‘रुड़की वाटर कॉन्क्लेव (आरडब्ल्यूसी 2026)’ का आयोजन किया जा रहा है। ‘ट्रांसबाउंड्री वाटर कोऑपरेशन थ्रू नेक्सस अप्रोच’ विषय पर आधारित यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन जल प्रबंधन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सतत विकास के मुद्दों पर गहन विमर्श का मंच बना है। कॉन्क्लेव का आयोजन राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान के सहयोग से किया जा रहा है। उद्घाटन सत्र में नीति आयोग के सदस्य विनोद के पॉल ने वर्चुअल संबोधन में जल सुरक्षा, जलवायु सहनशीलता और ऊर्जा–खाद्य–जल नेक्सस के बीच बढ़ती अंतर्संबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई और डेटा सेंटरों के विस्तार से जल की मांग तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में विज्ञान-आधारित और सहयोगात्मक जल शासन की आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

द्विवार्षिक कॉन्क्लेव में देश-विदेश के 42 प्रमुख वक्ता अपने व्याख्यान और शोध प्रस्तुत कर रहे हैं। अमेरिका, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, इजराइल, नीदरलैंड, कनाडा, जापान, नॉर्वे, श्रीलंका, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ताइवान और नेपाल सहित कई देशों के वैज्ञानिक, नीति विशेषज्ञ और उद्योग प्रतिनिधि इसमें भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम के पहले दिन पारंपरिक दीप प्रज्वलन और संस्थान के कुलगीत के साथ सत्र का शुभारंभ हुआ। कॉन्क्लेव के संयोजक प्रो. आशीष पांडे ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि सीमापार जल चुनौतियों के समाधान के लिए नेक्सस दृष्टिकोण अत्यंत प्रासंगिक है, जो जल, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को एकीकृत रूप से देखने का अवसर देता है। आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत सहित अन्य वक्ताओं ने जलवायु परिवर्तन, हाइड्रो-मौसमीय चरम घटनाओं, भूजल स्थिरता और जल गुणवत्ता जैसे मुद्दों पर समग्र दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

सामुदायिक सहभागिता पर विशेष पैनल

आरडब्ल्यूसी 2026 की प्रमुख विशेषताओं में ‘जल सहयोग में सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक-आर्थिक पहलू’ विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय पैनल चर्चा शामिल है। इसमें पद्मश्री सवजीभाई धोलकिया, पोपटराव पवार, भरत भूषण त्यागी और उमाशंकर पांडे जैसे सामाजिक नेतृत्वकर्ताओं के साथ वरिष्ठ नीति-निर्माता भी भाग ले रहे हैं। यह पैनल विज्ञान, नीति और जमीनी अनुभव के बीच सेतु स्थापित कर समावेशी एवं संस्थागत रूप से सुदृढ़ जल शासन ढांचा विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण विमर्श कर रहा है। कॉन्क्लेव का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान, नीति ढांचे और सामुदायिक सहभागिता को एकीकृत कर क्रियाशील और टिकाऊ जल प्रबंधन रणनीतियां विकसित करना है। सीमापार नदी बेसिन प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के संदर्भ में यह सम्मेलन वैश्विक संवाद को मजबूती प्रदान कर रहा है। रुड़की वाटर कॉन्क्लेव 2026 न केवल अकादमिक और शोध समुदाय के लिए महत्वपूर्ण मंच है, बल्कि यह नीति निर्माण और व्यावहारिक जल प्रबंधन के बीच समन्वय स्थापित करने की दिशा में भी एक सार्थक प्रयास माना जा रहा है।

 

 

 

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