ऊर्जा कर्मचारियों का देशव्यापी आंदोलन, 10 मार्च को बिजली सेवाओं पर असर तय..
उत्तराखंड: देशभर में बिजली सेवाओं से जुड़े कर्मचारी 10 मार्च को राष्ट्रव्यापी कार्य बहिष्कार करेंगे। ऊर्जा क्षेत्र में प्रस्तावित नीतिगत बदलावों और संभावित निजीकरण के विरोध में कर्मचारी संगठनों और अभियंता संघों ने एक दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। हालांकि फिलहाल यह आंदोलन एक दिवसीय बताया जा रहा है, लेकिन संगठनों ने संकेत दिए हैं कि मांगों पर सकारात्मक निर्णय न होने की स्थिति में आंदोलन को आगे भी जारी रखा जा सकता है। ऊर्जा क्षेत्र के कर्मचारियों में लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। कर्मचारियों का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन कानूनों और नीतिगत बदलावों से बिजली व्यवस्था की मौजूदा संरचना प्रभावित हो सकती है। उनका मानना है कि यदि नई व्यवस्थाएं लागू होती हैं तो बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण व्यवस्था में निजी कंपनियों की भूमिका बढ़ेगी, जिससे सेवाओं का व्यावसायीकरण तेज हो सकता है।
कर्मचारी संगठनों के अनुसार इसका असर केवल विभागीय कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम उपभोक्ताओं और किसानों पर भी पड़ेगा। उनका तर्क है कि निजी भागीदारी बढ़ने से बिजली दरों में वृद्धि की आशंका है और सेवा वितरण का स्वरूप भी बदल सकता है। बिजली जैसी बुनियादी सेवा में अत्यधिक निजीकरण को कर्मचारी जनहित के खिलाफ मान रहे हैं। संगठनों का आरोप है कि इस मुद्दे पर कई बार सरकार के समक्ष अपनी चिंताएं रखी गईं, लेकिन अपेक्षित स्तर पर समाधान नहीं निकल सका। लंबे समय से ज्ञापन, बैठकों और विरोध कार्यक्रमों के माध्यम से संवाद की कोशिशें जारी थीं। अब कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से कार्य बहिष्कार का रास्ता चुना है।
इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन में देश के कई राज्यों के विद्युत कर्मचारी और अभियंता संगठन शामिल हो रहे हैं। इनके साथ बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण से जुड़े विभिन्न कर्मचारी संघों का भी समर्थन मिल रहा है। ऐसे में यह आंदोलन ऊर्जा क्षेत्र पर व्यापक असर डाल सकता है। उत्तराखंड में भी इस आह्वान का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। राज्य के विद्युत कर्मचारी और अभियंता संगठन कार्य बहिष्कार को सफल बनाने के लिए बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं में जुटे हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि प्रदेश के ऊर्जा कर्मी राष्ट्रीय स्तर पर उठाए जा रहे मुद्दों के समर्थन में पूरी मजबूती से आंदोलन में भाग लेंगे।
प्रदेश के कर्मचारियों का यह भी कहना है कि राष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ राज्य स्तर की समस्याएं भी लंबे समय से लंबित हैं। सेवा शर्तें, पदोन्नति, कार्य परिस्थितियां और विभागीय नीतियों से जुड़े कई मामलों में समाधान की जरूरत महसूस की जा रही है। ऐसे में आंदोलन के दौरान इन मांगों को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। हालांकि कर्मचारी संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जरूरी सेवाओं को पूरी तरह बाधित न होने देने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इसके बावजूद यदि बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्य से दूर रहते हैं तो बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि बिजली जैसी महत्वपूर्ण सेवा से जुड़े कर्मचारियों का यह राष्ट्रव्यापी आंदोलन सरकार के लिए गंभीर संकेत है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच वार्ता की संभावनाएं बन सकती हैं। फिलहाल 10 मार्च को लेकर देशभर में तैयारियां तेज हैं और कई राज्यों में कर्मचारी संगठन सक्रिय रूप से आंदोलन की रूपरेखा को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

