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पिथौरागढ़ में 108 सेवा बेपटरी, जर्जर एंबुलेंसों से मरीजों की जान जोखिम में..

पिथौरागढ़ में 108 सेवा बेपटरी, जर्जर एंबुलेंसों से मरीजों की जान जोखिम में..

 

 

 

उत्तराखंड: सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल तस्वीर एक बार फिर सामने आई है। पहले से डॉक्टरों की कमी, अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे मरीजों को अब आपातकालीन परिवहन सेवा का भी पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालात ऐसे हैं कि मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस सेवा ही खुद ‘बीमार’ नजर आ रही है। जिले में संचालित 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। उबड़-खाबड़ पहाड़ी सड़कों पर दौड़ रही जर्जर एंबुलेंसें बीच रास्ते में दम तोड़ रही हैं, जिससे गंभीर मरीजों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं की जान जोखिम में पड़ रही है। कई मामलों में एंबुलेंस के रास्ते में खराब होने और कर्मचारियों द्वारा वाहन को धक्का देकर स्टार्ट करने जैसी घटनाएं सामने आई हैं।

जिला स्तर पर कुल 18 एंबुलेंस संचालित बताई जा रही हैं, लेकिन इनमें से 8 वाहन अपने निर्धारित सेवा मानकों से बाहर हो चुके हैं। नियमों के अनुसार एंबुलेंस का अधिकतम परिचालन काल 10 वर्ष अथवा लगभग 2.5 लाख किलोमीटर तय किया गया है, जिसे ये वाहन पूरा कर चुके हैं। तकनीकी मानकों के अनुसार इन्हें सेवा से बाहर किया जाना चाहिए था, लेकिन बजट और संसाधनों के अभाव में अब भी इन्हें सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। पुरानी और खटारा हो चुकी इन एंबुलेंसों को मजबूरी में संचालन में बनाए रखने से मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आपात स्थिति में समय पर चिकित्सा सहायता न मिल पाने का सीधा असर जीवनरक्षा पर पड़ रहा है। हाल के दिनों में कई घटनाओं ने इस व्यवस्था की जमीनी हकीकत उजागर की है।

पिथौरागढ़ ही नहीं, आसपास के जिलों बागेश्वर, अल्मोड़ा और चंपावत के मरीज भी इस सेवा पर निर्भर रहते हैं, लेकिन एंबुलेंस की अनुपलब्धता से उन्हें भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जिले में उपलब्ध 10 अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति वाली एंबुलेंसों का उपयोग मुख्य रूप से गंभीर मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर करने में किया जा रहा है। अक्सर 3 से 4 एंबुलेंस मरीजों को लेकर जिले से बाहर रहती हैं, विशेषकर हल्द्वानी जैसे हायर सेंटर तक रेफर मामलों में। ऐसे में स्थानीय स्तर पर आपातकालीन कॉल आने पर तत्काल 108 सेवा उपलब्ध नहीं हो पाती, जिससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है।

स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार पिथौरागढ़ जिले की 8 एंबुलेंसें ढाई लाख किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर चुकी हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि नए वित्तीय वर्ष में नई एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे व्यवस्था में सुधार संभव हो सकेगा। फिलहाल, हायर सेंटर तक मरीजों को भेजने और जिले के भीतर आपात सेवाएं उपलब्ध कराने में गंभीर संचालनात्मक चुनौतियां बनी हुई हैं। सीमांत और भौगोलिक रूप से संवेदनशील जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की यह स्थिति प्रशासनिक तैयारियों और संसाधन प्रबंधन पर सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में समय पर एंबुलेंस उपलब्ध होना जीवन और मृत्यु के बीच का फर्क तय करता है, ऐसे में सेवा व्यवस्था का मजबूत होना बेहद जरूरी है।

 

 

 

 

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