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उत्तराखंड में चंदन की खेती से किसानों की आय बढ़ेगी, सुगंध पौध केंद्र के शोध में सफलता..

उत्तराखंड में चंदन की खेती से किसानों की आय बढ़ेगी, सुगंध पौध केंद्र के शोध में सफलता..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड के किसानों के लिए खुशखबरी है। अब प्रदेश में चंदन की खुशबू किसानों की आर्थिकी को भी महकाने की तैयारी में है। राज्य सुगंध पौध केंद्र की ओर से पिछले एक दशक से अधिक समय से किए जा रहे शोध में चंदन की खेती को लेकर उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। शोध के दौरान उगाए गए चंदन की लकड़ी और उससे प्राप्त तेल गुणवत्ता के सभी मानकों पर खरे उतरे हैं, जिससे प्रदेश में चंदन की व्यावसायिक खेती की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। सुगंध पौध केंद्र ने किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से देहरादून के रानीपोखरी क्षेत्र में क्लस्टर मॉडल पर चंदन के पौधों का ट्रायल किया था। इस ट्रायल के दौरान चंदन के पौधों की वृद्धि, उत्पादन क्षमता और लकड़ी की गुणवत्ता का बारीकी से अध्ययन किया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार यहां उगाए गए चंदन की ग्रोथ प्राकृतिक रूप से उगने वाले चंदन के समान पाई गई है।

ट्रायल के तहत प्राप्त चंदन की लकड़ी और तेल की सेलाकुई स्थित प्रयोगशाला में वैज्ञानिक जांच कराई गई, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि ट्रायल में उगाए गए चंदन की लकड़ी और तेल की गुणवत्ता पूरी तरह मानक के अनुरूप है। इससे यह साबित होता है कि उत्तराखंड की जलवायु और मिट्टी चंदन की खेती के लिए अनुकूल है। सुगंध पौध केंद्र के वैज्ञानिकों का कहना है कि बाजार में वर्तमान समय में चंदन का तेल लगभग 2.5 लाख रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है, जबकि चंदन की लकड़ी की कीमत 3,500 रुपये प्रति किलो तक मिल रही है। यदि कोई किसान एक हेक्टेयर भूमि पर वैज्ञानिक तरीके से चंदन की खेती करता है, तो वह लकड़ी से करीब तीन करोड़ रुपये और तेल से लगभग 4.4 करोड़ रुपये तक की आय अर्जित कर सकता है। ऐसे में चंदन की खेती किसानों के लिए एक अत्यंत लाभकारी विकल्प बन सकती है।

चंदन को केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि औषधीय, धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसकी लकड़ी और तेल का उपयोग इत्र, साबुन, कॉस्मेटिक और अन्य सुगंधित उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। इसके साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों में हवन, तिलक, माला और मूर्तियों के निर्माण में भी चंदन का विशेष स्थान है। माना जाता है कि चंदन की सुगंध मानसिक शांति प्रदान करती है और तनाव कम करने में सहायक होती है। सुगंध पौध केंद्र अब अपने शोध के आधार पर प्रदेश में चंदन की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने जा रहा है। आने वाले समय में उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां चंदन की खेती की बेहतर संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा, ताकि वे चंदन की खेती अपनाकर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना धरातल पर सफलतापूर्वक लागू होती है, तो उत्तराखंड चंदन उत्पादन के क्षेत्र में एक नई पहचान बना सकता है और इससे प्रदेश के किसानों की आर्थिकी को मजबूत आधार मिलेगा।

 

 

 

 

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