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उत्तराखंड में कृषि का नया मॉडल, मखाना खेती का पायलट प्रोजेक्ट शुरू..

उत्तराखंड में कृषि का नया मॉडल, मखाना खेती का पायलट प्रोजेक्ट शुरू..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से अब मखाना की खेती की शुरुआत कर दी गई है। राज्य में पहली बार इस फसल को प्रोत्साहित करने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिसकी औपचारिक शुरुआत हरिद्वार जिले के लक्सर क्षेत्र स्थित गंगदासपुर बालावाली गांव से की गई। इस दौरान कृषि मंत्री गणेश जोशी ने स्वयं मखाना रोपण कर इस नई पहल का शुभारंभ किया। यह पायलट प्रोजेक्ट बिहार की एक संस्था के सहयोग से शुरू किया गया है, जहां मखाना उत्पादन पहले से ही बड़े स्तर पर होता है। उत्तराखंड में इस फसल को अपनाने से किसानों को पारंपरिक खेती के साथ एक अतिरिक्त आय का स्रोत मिल सकेगा।

इस अवसर पर कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार भी देश में मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। इसी क्रम में वर्ष 2025 में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य उत्तराखंड सहित 11 राज्यों में मखाना उद्योग को आधुनिक और सशक्त बनाना है। मखाना विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक 476 करोड़ रुपये के बजट के साथ एक व्यापक योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत अनुसंधान, उन्नत बीज उत्पादन, किसानों का कौशल विकास, उत्पाद का मूल्यवर्धन, ब्रांडिंग, विपणन और निर्यात को बढ़ावा दिया जा रहा है।

राज्य स्तर पर भी इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। योजना के तहत वर्ष 2025-26 के अंतिम चरण में उत्तराखंड को 50 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसके माध्यम से कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी (हरिद्वार), ढकरानी (देहरादून) और काशीपुर (उधम सिंह नगर) के सहयोग से किसानों को मखाना उत्पादन के लिए प्रशिक्षण, सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। इसके साथ ही राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 143.16 लाख रुपये की कार्ययोजना को भी मंजूरी दी है, जिसमें मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को नई और लाभकारी फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जाए, जिससे उनकी आमदनी में स्थायी वृद्धि हो सके।

उल्लेखनीय है कि राज्य में बागवानी और वैकल्पिक खेती को भी लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। सेब की अति सघन बागवानी के तहत बड़े स्तर पर क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, वहीं मिलेट्स, कीवी और ड्रैगन फ्रूट जैसी फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए अलग-अलग नीतियां लागू की जा चुकी हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मखाना उत्पादन का यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले समय में यह उत्तराखंड के किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प साबित हो सकता है और राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है।

 

 

 

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