Breaking
Thu. May 28th, 2026

केदारनाथ-यमुनोत्री मार्गों पर घोड़ा-खच्चरों के संचालन के लिए नए नियम लागू..

केदारनाथ-यमुनोत्री मार्गों पर घोड़ा-खच्चरों के संचालन के लिए नए नियम लागू..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड सरकार ने चारधाम और उच्च हिमालयी यात्रा मार्गों पर घोड़ा-खच्चरों के संचालन को लेकर नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू कर दी है। यह नई व्यवस्था केदारनाथ, यमुनोत्री, हेमकुंड साहिब और आदि कैलाश यात्रा मार्गों पर तत्काल प्रभाव से लागू होगी। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुरक्षित और व्यवस्थित यात्रा सुनिश्चित करने के साथ-साथ पशुओं के कल्याण और संरक्षण को प्राथमिकता देना है। नई एसओपी उच्च न्यायालय नैनीताल और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है। शासन की ओर से जारी निर्देशों में यात्रा मार्गों की वहन क्षमता भी तय कर दी गई है। इसके तहत केदारनाथ यात्रा मार्ग पर अधिकतम 5000 घोड़ा-खच्चरों के संचालन की अनुमति होगी। वहीं हेमकुंड साहिब मार्ग पर करीब 1050 और यमुनोत्री यात्रा मार्ग पर लगभग 595 घोड़ा-खच्चरों को संचालन की अनुमति दी जाएगी।

सरकार ने सभी पशुओं का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। पंजीकरण से पहले पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण, ग्लैंडर्स जांच, ईयर टैगिंग और माइक्रोचिपिंग कराना जरूरी होगा। स्वास्थ्य प्रमाणपत्र की वैधता 45 दिन तक रहेगी। बिना पंजीकरण वाले पशुओं के संचालन पर पूरी तरह रोक रहेगी। एसओपी में पशु कल्याण को ध्यान में रखते हुए कई विशेष प्रावधान किए गए हैं। प्रत्येक एक किलोमीटर पर स्वच्छ और गुनगुने पेयजल की व्यवस्था करनी होगी। पशुओं के लिए पर्याप्त चारा और इलेक्ट्रोलाइट उपलब्ध कराना भी अनिवार्य किया गया है। पशुओं को शारीरिक नुकसान से बचाने के लिए हल्की और वाटरप्रूफ काठियों के उपयोग पर जोर दिया गया है।

यात्रा मार्गों पर निगरानी बढ़ाने के लिए संवेदनशील स्थानों और पानी के ट्रफ के पास सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। प्रत्येक जिले में अधिकारियों और पशु चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी, जो संचालन और स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी करेंगे। नई व्यवस्था में पशुओं के साथ क्रूरता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया है। पशुओं पर अधिक भार लादना, घायल या बीमार पशुओं से काम लेना, बिना टोकन संचालन, पशुओं को पीटना और तेज गति से दौड़ाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। ईयर टैग और माइक्रोचिप से छेड़छाड़ को भी गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 और भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित संचालक का लाइसेंस निरस्त कर उसे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और एफआईआर भी दर्ज की जाएगी।

एसओपी के अनुसार प्रत्येक पशु के साथ संचालक की उपस्थिति अनिवार्य होगी और एक पशु स्वामी अधिकतम दो पशुओं का ही संचालन कर सकेगा। प्रतिदिन केवल एक टोकन जारी करने की व्यवस्था लागू की गई है। यात्रा मार्गों पर स्थायी और अस्थायी पशु चिकित्सालय भी स्थापित किए जाएंगे। यहां 24 घंटे उपचार सुविधा उपलब्ध रहेगी और पशु चिकित्सकों के साथ पैरावेट कर्मियों की तैनाती की जाएगी। बीमार, घायल या परित्यक्त पशुओं के उपचार और संरक्षण की विशेष व्यवस्था की जाएगी। मृत पशुओं के शवों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण होगा और पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने म्यूल टास्क फोर्स के गठन, अतिरिक्त चेक पोस्ट, रात्रि गश्त और डिजिटल रिकॉर्डिंग प्रणाली को भी अनिवार्य किया है। पशु क्रूरता से संबंधित शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

 

 

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *