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देहरादून में पांच दिन तक दिखेगी भारत की सांस्कृतिक विरासत, 11 जुलाई से शुरू होगा ‘लोक संवर्धन पर्व’…

देहरादून में पांच दिन तक दिखेगी भारत की सांस्कृतिक विरासत, 11 जुलाई से शुरू होगा ‘लोक संवर्धन पर्व’..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून अगले पांच दिनों तक देश की विविध कला, संस्कृति, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों का केंद्र बनने जा रही है। भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में 11 से 15 जुलाई तक परेड ग्राउंड में लोक संवर्धन पर्व का आयोजन किया जाएगा। यह इस राष्ट्रीय महोत्सव का छठा संस्करण है और पहली बार किसी राज्य सरकार के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। महोत्सव का उद्घाटन 11 जुलाई को केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा राज्य सरकार के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। आयोजन में प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रहेगा और आम लोग प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक इसका आनंद ले सकेंगे।

पहली बार राज्य सरकार के साथ हो रहा आयोजन

लोक संवर्धन पर्व का यह संस्करण कई मायनों में खास माना जा रहा है। अब तक इस आयोजन का संचालन केवल केंद्र सरकार के स्तर पर किया जाता रहा, लेकिन इस बार उत्तराखंड सरकार इसके आयोजन में साझेदार बनी है। इसके साथ ही उत्तराखंड प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन (PM VIKAS) योजना के अंतर्गत इस आयोजन में भागीदारी करने वाला पहला राज्य बन गया है। आयोजन का उद्देश्य पारंपरिक कला, शिल्प, हथकरघा, स्थानीय उत्पादों और पाक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। साथ ही कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों और छोटे उद्यमियों को बाजार उपलब्ध कराकर उनकी आजीविका को मजबूत करना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है।

150 से अधिक स्टॉल पर दिखेगी देश की सांस्कृतिक झलक

महोत्सव में देशभर के कारीगरों और शिल्पकारों के करीब 150 स्टॉल लगाए जाएंगे। इनमें लगभग 40 प्रतिशत स्टॉल उत्तराखंड के पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा और स्थानीय उत्पादों को समर्पित होंगे। इससे प्रदेश के कारीगरों को अपने उत्पादों को राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर के हस्तशिल्प, गुजरात की अजरख ब्लॉक प्रिंटिंग, लाख की चूड़ियां, पीतल कला, लकड़ी की नक्काशी, टेराकोटा, बांस और बेंत से बने उत्पाद, पारंपरिक वस्त्र तथा देश के विभिन्न राज्यों की लोक कलाओं का भी प्रदर्शन किया जाएगा। कला और शिल्प के साथ-साथ महोत्सव में खानपान के शौकीनों के लिए भी खास इंतजाम किए गए हैं। लगभग 20 फूड स्टॉल पर उत्तराखंड के गढ़वाली और कुमाऊँनी व्यंजनों के अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र, लखनऊ समेत देश के विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक पकवान उपलब्ध रहेंगे।

लाइव डेमो और उद्यमिता सत्र होंगे आकर्षण

महोत्सव के दौरान आगंतुक केवल उत्पादों की खरीदारी ही नहीं कर सकेंगे, बल्कि मास्टर कारीगरों को पारंपरिक शिल्प तैयार करते हुए भी देख सकेंगे। लाइव डेमो के जरिए शिल्प निर्माण की प्रक्रिया को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही कारीगरों और उद्यमियों के लिए डिजिटल मार्केटिंग, व्यापार विस्तार, ब्रांडिंग और खरीदार-विक्रेता संवाद जैसे विशेष सत्र भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि उन्हें नए बाजार और व्यवसायिक अवसरों की जानकारी मिल सके। लोक संवर्धन पर्व की शामें सांस्कृतिक कार्यक्रमों के नाम रहेंगी। उत्तराखंड की लोक संस्कृति पर आधारित प्रस्तुतियों के साथ देश के कई प्रसिद्ध कलाकार मंच पर अपनी प्रस्तुति देंगे। उद्घाटन दिवस पर मशहूर गजल गायक तलत अजीज अपनी प्रस्तुति देंगे। वहीं अगले दिनों में ज्योति नूरां, किशन महिपाल, विवेक नौटियाल, माया उपाध्याय, उत्तराखंड का लोकप्रिय लोक बैंड ‘पांडवाज़’ और पंजाबी गायक परमिश वर्मा भी दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। आयोजकों ने प्रदेशवासियों, पर्यटकों, विद्यार्थियों, हस्तशिल्प प्रेमियों, खरीदारों और निर्यातकों से इस पांच दिवसीय महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि यह आयोजन केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि देश की पारंपरिक कला, स्थानीय उत्पादों और शिल्पकारों को प्रोत्साहन देने का एक बड़ा मंच भी है, जहां एक ही स्थान पर भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी।

 

 

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