योग प्रशिक्षकों की नियुक्ति अटकी, मंजूरी के महीनों बाद भी नहीं मिला रोजगार..
उत्तराखंड: प्रदेश में शिक्षा और युवा रोजगार से जुड़ी दो महत्वपूर्ण योजनाएं अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही हैं। एक ओर योग प्रशिक्षित युवाओं को सरकारी विद्यालयों में नियुक्ति का इंतजार है, वहीं दूसरी ओर लाखों छात्र-छात्राएं सरकार की ओर से मिलने वाली मुफ्त कॉपियों का इंतजार कर रहे हैं। दोनों ही मामलों में प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रियाएं चलने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर लाभार्थियों को अभी तक राहत नहीं मिल सकी है। योग शिक्षा को बढ़ावा देने और प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार ने पूर्व में महत्वपूर्ण निर्णय लिए थे। मंत्रिमंडल स्तर पर स्वीकृति मिलने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में योग प्रशिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ होगा। इसके लिए शासन स्तर पर आदेश भी जारी किए गए और पदों की स्वीकृति संबंधी प्रक्रियाएं भी पूरी की गईं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में योग प्रशिक्षित युवा अब भी रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
योग प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार और विभागीय स्तर पर कई बार घोषणाएं होने के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है। उनका तर्क है कि योग को वैश्विक पहचान दिलाने में उत्तराखंड की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन विडंबना यह है कि प्रदेश में ही योग शिक्षा प्राप्त युवा रोजगार के अवसरों के लिए भटक रहे हैं। दूसरी ओर शिक्षा विभाग का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में प्रत्येक विद्यालय में अलग से योग प्रशिक्षक की नियुक्ति करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। विभागीय स्तर पर इस दिशा में वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत विद्यालयों में कार्यरत व्यायाम शिक्षकों को दूरस्थ शिक्षा माध्यम से योग संबंधी डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रम करने के लिए प्रोत्साहित किए जाने की योजना पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इससे विद्यालयों में योग शिक्षा को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
योग प्रशिक्षित बेरोजगारों का आरोप है कि नियुक्ति संबंधी जानकारी के लिए वे लगातार विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। विभागीय स्तर पर हालांकि यह कहा जा रहा है कि नियुक्ति की प्रक्रिया जिला स्तर पर संचालित की जानी है और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसी बीच छात्रों को मुफ्त नोटबुक उपलब्ध कराने की योजना भी समय पर धरातल पर नहीं उतर सकी है। प्रदेश के सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत लगभग 10 लाख छात्र-छात्राओं को शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में मुफ्त कॉपियां उपलब्ध कराई जानी थीं। इस संबंध में प्रस्ताव को मंजूरी भी मिल चुकी थी, लेकिन नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बावजूद बड़ी संख्या में विद्यार्थियों तक कॉपियां नहीं पहुंच सकी हैं।
विद्यालयों और अभिभावकों का कहना है कि शैक्षणिक गतिविधियां शुरू हुए काफी समय हो चुका है और विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए आवश्यक सामग्री की जरूरत है। ऐसे में योजना के क्रियान्वयन में हुई देरी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शिक्षा विभाग का दावा है कि दोनों मामलों में आवश्यक कार्रवाई जारी है। अधिकारियों के अनुसार योग प्रशिक्षकों की तैनाती को लेकर जिला स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, जबकि मुफ्त कॉपियों के वितरण की योजना को भी जल्द अमल में लाया जाएगा। विभाग का कहना है कि छात्रों को नोटबुक उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जल्द ही इसका लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाएगा। हालांकि रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे योग प्रशिक्षित युवा और मुफ्त कॉपियों की प्रतीक्षा कर रहे लाखों विद्यार्थी अब योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

