मसूरी अकादमी में शुरू होगा AI गवर्नेंस प्रोग्राम, उत्तराखंड से भी जाएंगे अधिकारी..
उत्तराखंड: देश में तेजी से बढ़ती डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल के बीच अब प्रशासनिक व्यवस्था को भी आधुनिक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में जल्द ही अधिकारियों को AI आधारित शासन प्रणाली और डिजिटल गवर्नेंस की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। अकादमी ने इस संबंध में उत्तराखंड सरकार को पत्र भेजकर अधिकारियों के नामांकन मांगे हैं। अकादमी की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि ‘चैंपियंस प्रोग्राम फॉर डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन’ के तहत AI आधारित प्रशासनिक प्रशिक्षण का तीसरा चरण 1 जून से 5 जून 2026 तक आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम विशेष रूप से सिविल सेवकों को आधुनिक तकनीक, डेटा आधारित प्रशासन और डिजिटल निर्णय प्रणाली से जोड़ने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
अकादमी के संयुक्त निदेशक एवं कोर्स समन्वयक गणेश शंकर मिश्रा द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि AI आधारित प्रशासनिक मॉडल को विभिन्न सरकारी विभागों और हितधारकों से सकारात्मक समर्थन मिल रहा है। इसी कारण इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की मांग लगातार बढ़ रही है। कार्यक्रम में अधिकारियों को नई तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग, डिजिटल गवर्नेंस और प्रशासनिक नवाचारों की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को डेटा आधारित निर्णय प्रणाली, डिजिटल प्रशासन, उभरती तकनीकों, सेवा वितरण प्रणाली और प्रशासनिक कार्यक्षमता बढ़ाने जैसे विषयों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। अकादमी का मानना है कि आने वाले वर्षों में शासन व्यवस्था और नागरिक सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका काफी बढ़ने वाली है। ऐसे में अधिकारियों को समय रहते नई तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षित करना आवश्यक हो गया है।
उत्तराखंड सरकार से इस कार्यक्रम के लिए अधिकतम चार अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों के नाम मांगे गए थे। इसके अलावा राज्य प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान या किसी अन्य क्षमता निर्माण संस्थान से भी एक अधिकारी को नामित करने को कहा गया है। इस अधिकारी को आगे चलकर ‘मास्टर ट्रेनर’ के रूप में तैयार किया जाएगा, ताकि राज्य स्तर पर भी इसी तरह के AI आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा सकें। सूत्रों के अनुसार उत्तराखंड से तीन वरिष्ठ अधिकारियों को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दी गई है। इनमें प्रमुख सचिव आरके मीनाक्षी सुंदरम, सचिव बीवीआरसी पुरुषोत्तम और अपर सचिव स्तर के अधिकारी मनुज गोयल शामिल हैं।
अकादमी ने स्पष्ट किया है कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों की संख्या सीमित रखी गई है और नामांकन ‘फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व’ आधार पर स्वीकार किए जाएंगे। राज्यों से समय रहते अधिकारियों के नाम भेजने का अनुरोध किया गया था ताकि प्रशिक्षण की व्यवस्थाएं सुचारु रूप से पूरी की जा सकें। देशभर में सरकारी विभाग अब धीरे-धीरे AI और डेटा आधारित तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, पुलिसिंग, आपदा प्रबंधन, राजस्व और नागरिक सेवाओं में डिजिटल सिस्टम का दायरा लगातार बढ़ रहा है। केंद्र सरकार भी डिजिटल इंडिया मिशन और ई-गवर्नेंस परियोजनाओं के तहत तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा दे रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में AI आधारित तकनीक भविष्य में बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। आपदा प्रबंधन, मौसम पूर्वानुमान, पर्यटन प्रबंधन, वन संरक्षण और दूरस्थ क्षेत्रों तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने में डिजिटल तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों को AI आधारित प्रशिक्षण देना भविष्य की जरूरतों के लिहाज से अहम कदम माना जा रहा है। मसूरी स्थित प्रशासन अकादमी पहले भी प्रशासनिक सुधार, नेतृत्व क्षमता और आधुनिक शासन प्रणाली से जुड़े कई प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करती रही है। अब AI आधारित गवर्नेंस पर शुरू किया गया यह नया कार्यक्रम प्रशासनिक ढांचे को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

