चारधाम यात्रा ने पकड़ी रफ्तार, 32 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन..
आदि कैलाश में भी बढ़ रहा आस्था का सैलाब..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में चल रही चारधाम यात्रा लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। राज्य सरकार के अनुसार यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक 32 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम पहुंच चुके हैं। वहीं सीमांत क्षेत्र में स्थित आदि कैलाश यात्रा को लेकर भी लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार यात्रा प्रबंधन, सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर लगातार निगरानी बनाए हुए है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि उत्तराखंड इस समय देशभर की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु चारधाम और अन्य धार्मिक स्थलों का रुख कर रहे हैं। आगामी दिनों में कांवड़ यात्रा और भविष्य में आयोजित होने वाले कुंभ मेले को देखते हुए सरकार सभी व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।
सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाएं सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा में दर्शन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और नियंत्रित बनाने के लिए मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) को और प्रभावी बनाया जाए, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सीएम ने यात्रा मार्गों पर यातायात प्रबंधन को लेकर भी विशेष निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक यात्रा मार्गों पर वाहनों की आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंध का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। इस दौरान केवल आवश्यक सेवाओं और आपूर्ति से जुड़े भारी वाहनों को ही संचालन की अनुमति दी जाए, जबकि दिन के समय बड़े वाहनों के संचालन पर नियंत्रण रखा जाए ताकि यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए मुख्यमंत्री ने भीड़ प्रबंधन को और अधिक वैज्ञानिक तथा व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी धाम या प्रमुख पड़ाव पर निर्धारित क्षमता से अधिक भीड़ होने की स्थिति में होल्डिंग एरिया और चेक प्वाइंट्स के माध्यम से यात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित किया जाए। चरणबद्ध तरीके से श्रद्धालुओं को आगे भेजा जाए, जिससे धामों में अव्यवस्था और दबाव की स्थिति उत्पन्न न हो। सरकार ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि जहां कहीं यात्रियों को रोका या ठहराया जा रहा है, वहां पार्किंग, भोजन, पेयजल, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हों। साथ ही यात्रियों को यात्रा मार्ग, मौसम और यातायात से संबंधित हर आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो।
सीएम ने कहा कि अब चारधाम यात्रा अपने दूसरे और अपेक्षाकृत अधिक चुनौतीपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है। मानसून की शुरुआत के साथ भूस्खलन, सड़क बाधित होने और खराब मौसम जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। ऐसे में यात्रा प्रबंधन को अधिक सतर्कता, तकनीकी तैयारी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता के साथ संचालित करना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं से प्राप्त शिकायतों, सुझावों और फीडबैक की नियमित समीक्षा की जाए तथा आवश्यकतानुसार तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। संवेदनशील और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में जेसीबी मशीनें, पोकलैंड, एंबुलेंस, राहत एवं बचाव उपकरण तथा सैटेलाइट फोन जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से उपलब्ध रखी जाएं ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
सीएम ने गढ़वाल मंडल के आयुक्त और पुलिस महानिरीक्षक को यात्रा व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा करने तथा श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश भी दिए हैं। इसके साथ ही यात्रा से जुड़े सभी जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को व्यवस्थाओं की निरंतर निगरानी रखने और समन्वित संचालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। यात्रा मार्गों पर संचालित होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में मूल्य सूची का स्पष्ट प्रदर्शन अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं से किसी प्रकार की मनमानी वसूली न हो। वहीं स्वच्छता को भी यात्रा प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए मुख्यमंत्री ने चारधाम और पैदल यात्रा मार्गों पर साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।
गंभीर मरीजों और आपात स्थिति से निपटने के लिए राज्य स्तर पर हेली एंबुलेंस सेवा के संचालन हेतु एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके अलावा केदारनाथ पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त शेड, विश्राम स्थल और बारिश तथा धूप से बचाव के बेहतर इंतजाम करने पर भी जोर दिया गया है। राज्य सरकार का मानना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम दर्शन और प्रभावी संवाद के सिद्धांत पर आधारित व्यवस्थाओं के माध्यम से चारधाम यात्रा को और अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित तथा सफल बनाया जा सकता है।

