योजनाओं की प्रगति के साथ जमीनी असर पर भी रखें नजर- मुख्य सचिव..
उत्तराखंड: प्रदेश में सरकार की योजनाओं और 25 सूत्रीय कार्यक्रम के क्रियान्वयन को लेकर शासन ने अब सिर्फ आंकड़ों तक सीमित समीक्षा के बजाय योजनाओं के वास्तविक असर पर फोकस करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में 25 बिंदु कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से योजनाओं की प्रगति के साथ यह भी पता लगाने को कहा कि उनका लाभ जमीनी स्तर पर लोगों तक कितना पहुंच रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक योजना के परिणामों का आकलन लाभार्थियों को हुए प्रत्यक्ष फायदे के आधार पर किया जाए। साथ ही जिन क्षेत्रों में अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है, वहां समस्याओं की पहचान कर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।
पिरूल कलेक्शन से कितनी बढ़ी लोगों की आय, तैयार होगा आंकड़ा
समीक्षा के दौरान पिरूल कलेक्शन से जुड़े कार्यों की भी जानकारी ली गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अब तक पिरूल संग्रहण से कितने लाभार्थियों को आर्थिक लाभ मिला और इसके माध्यम से कितनी मॉनेटाइजेशन हुई, इसका विस्तृत आंकड़ा तैयार किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इस पहल से लोगों की आय में कितना बदलाव आया है, इसका अलग से मूल्यांकन किया जाए। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि किसी योजना की सफलता केवल काम पूरा होने से नहीं मानी जा सकती, बल्कि यह देखना जरूरी है कि उससे लोगों की आमदनी और जीवन स्तर पर क्या असर पड़ा।
कूड़ा कलेक्शन से निस्तारण तक निगरानी के निर्देश
शहरी क्षेत्रों में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और कचरे के पृथक्करण की व्यवस्था को लेकर भी मुख्य सचिव ने अधिकारियों को गंभीरता से काम करने को कहा। उन्होंने कचरा उठाने से लेकर उसके सेग्रिगेशन और अंतिम निस्तारण तक पूरी प्रक्रिया की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने व्यवस्था को प्रभावी बनाने के साथ यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि कचरा संग्रहण के बाद उसके निस्तारण की प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही न हो। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को लेकर मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों और सचिव पेयजल को नियमित निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्थापित एसटीपी की क्षमता का पूरा उपयोग किया जाना चाहिए। मुख्य सचिव ने सभी एसटीपी के लिए एक प्रभावी केंद्रीकृत रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार करने पर जोर दिया। इससे प्लांट के संचालन, क्षमता के उपयोग और निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।
बड़े संस्थानों के एसटीपी की भी होगी नियमित जांच
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में अनिवार्य रूप से स्वयं के एसटीपी की व्यवस्था लागू कराने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि संबंधित संस्थानों को निर्धारित नियमों और मानकों का पालन करना होगा। उन्होंने अधिकारियों से एसटीपी के संचालन और मानकों की नियमित जांच करने को कहा, ताकि सीवेज ट्रीटमेंट की व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित न रहे। बैठक में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की भी समीक्षा हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि केवल अतिक्रमण हटाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि खाली कराई गई जगहों पर दोबारा कब्जा न हो। इसके लिए जिलास्तर पर नियमित निगरानी की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने अधिकारियों से अतिक्रमण की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने को कहा।
पार्किंग योजनाओं में तेजी लाने के निर्देश
जनपदों में पार्किंग विकसित करने से जुड़ी योजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने लंबित परियोजनाओं में तेजी लाने और उनके सामने आ रही प्रशासनिक या अन्य बाधाओं का समयबद्ध समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को परियोजनाओं की नियमित निगरानी करने और आवश्यक समन्वय के साथ काम आगे बढ़ाने को कहा। मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को 25 सूत्रीय कार्यक्रम की नियमित मासिक समीक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समीक्षा बैठकों में केवल लक्ष्य और उपलब्धियों के आंकड़े प्रस्तुत करने के बजाय योजनाओं की वास्तविक स्थिति पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से लाभार्थियों को मिल रहे फायदे, जमीनी स्तर पर सामने आ रही दिक्कतों और अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं होने के कारणों की पहचान करने को कहा। जिन बिंदुओं पर प्रगति धीमी है, वहां सुधारात्मक कार्रवाई के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करने के निर्देश भी दिए गए।

