पौड़ी जिला कारागार में कौशल विकास कार्यक्रम, 21 बंदियों ने सीखा स्वरोजगार का हुनर..
उत्तराखंड: जिला कारागार पौड़ी में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में चलाए जा रहे कौशल विकास कार्यक्रम के तहत 10 दिवसीय प्रशिक्षण पूरा हो गया। ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) की ओर से आयोजित इस प्रशिक्षण में 21 बंदियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मोमबत्ती और अलग-अलग प्रकार की अगरबत्ती तैयार करने की तकनीक सिखाई गई।
प्रशिक्षण का उद्देश्य बंदियों को ऐसे रोजगारपरक कौशल से जोड़ना है, जिनका इस्तेमाल वे जेल से बाहर आने के बाद स्वरोजगार शुरू करने में कर सकें। इससे उन्हें अपनी आजीविका चलाने के साथ परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां निभाने और समाज की मुख्यधारा से दोबारा जुड़ने में मदद मिल सकेगी। कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को मोमबत्ती और अगरबत्ती बनाने के विभिन्न चरणों की जानकारी दी गई। मास्टर ट्रेनर आशा नेगी ने बताया कि सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में रुचि दिखाई और पूरे उत्साह के साथ निर्माण प्रक्रिया को समझा। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशिक्षण के दौरान हासिल किया गया कौशल बंदियों के लिए भविष्य में आय का साधन बन सकता है।
स्वरोजगार योजनाओं से जोड़ने पर जोर
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आरसेटी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के साथ-साथ जेल में निरुद्ध बंदियों को भी रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का काम कर रहा है। उन्होंने बंदियों से अपील की कि सजा पूरी होने के बाद सरकार की स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी लेकर उनका लाभ उठाएं और प्रशिक्षण में सीखे हुनर को अपनी आजीविका का माध्यम बनाएं। उनके मुताबिक कौशल के जरिए बंदियों को दोबारा सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद मिल सकती है।
जेलों में कौशल विकास पर बढ़ रहा जोर
कारागार अधीक्षक कौशल कुमार ने कहा कि बंदियों के सुधार और पुनर्वास के साथ उन्हें रोजगार से जोड़ना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से जेल में अलग-अलग तरह के कौशल विकास कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का मकसद बंदियों को जेल से बाहर निकलने के बाद अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए तैयार करना है। मोमबत्ती और अगरबत्ती निर्माण जैसे कार्यों के जरिए उन्हें स्वरोजगार का विकल्प उपलब्ध कराया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से बंदियों में काम के प्रति रुचि विकसित करने के साथ उन्हें भविष्य में सम्मानजनक तरीके से जीवन की नई शुरुआत करने का अवसर मिल सकता है।

