Breaking
Wed. May 20th, 2026

मस्जिदों में शिफ्ट के आधार पर नमाज पढ़ने की सलाह, मदरसा बोर्ड ने CM योगी का किया समर्थन..

मस्जिदों में शिफ्ट के आधार पर नमाज पढ़ने की सलाह, मदरसा बोर्ड ने CM योगी का किया समर्थन..

 

 

उत्तराखंड: सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि धार्मिक गतिविधियां ऐसी जगहों पर आयोजित की जानी चाहिए, जहां आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। मुफ्ती शमून कासमी ने कहा कि सड़कें और सार्वजनिक स्थान आम जनता की सुविधा के लिए बनाए गए हैं। ऐसे में वहां नमाज अदा करने से यातायात प्रभावित हो सकता है और जरूरी सेवाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि कई बार एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं को रास्ता नहीं मिल पाता, जिससे गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए धार्मिक आयोजनों के दौरान सामाजिक जिम्मेदारी और आम नागरिकों की सुविधा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि यदि किसी मस्जिद में एक साथ सभी लोगों के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है, तो नमाज को अलग-अलग शिफ्ट में पढ़ाया जा सकता है। उनके अनुसार यह एक व्यावहारिक और बेहतर समाधान हो सकता है, जिससे सड़क पर भीड़ जमा होने की स्थिति से बचा जा सकेगा। मदरसा बोर्ड अध्यक्ष ने यह भी कहा कि किसी दूसरे धर्म की धार्मिक यात्रा या आयोजन का उदाहरण देकर सड़क पर नमाज पढ़ने को सही नहीं ठहराया जा सकता। उनका कहना था कि सभी धर्मों और समुदायों को सार्वजनिक व्यवस्था और कानून का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने समाज के जिम्मेदार लोगों और धार्मिक विद्वानों से भी इस मुद्दे पर सकारात्मक सोच के साथ आगे आने की अपील की।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में ऐसी स्थिति बहुत कम देखने को मिलती है और राज्य में धार्मिक सौहार्द बना हुआ है। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सीएम पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में अल्पसंख्यक समुदाय की शिक्षा और विकास के लिए कई योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। उनका कहना था कि सरकार युवाओं को बेहतर शिक्षा और अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। दरअसल, बकरीद से पहले योगी आदित्यनाथ ने सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर नमाज अदा न करने की अपील की थी। उन्होंने सुझाव दिया था कि जरूरत पड़ने पर मस्जिदों में अलग-अलग समय पर नमाज आयोजित की जा सकती है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई थीं। अब उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता के साथ-साथ सार्वजनिक व्यवस्था और आम लोगों की सुविधा का संतुलन बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

 

 

 

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *