धार्मिक शिक्षा के ड्राफ्ट पाठ्यक्रम पर हुई बैठक, समुदाय और शिक्षाविदों ने दिए सुझाव..
उत्तराखंड: राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण प्रदेश के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए कक्षा एक से आठवीं तक धार्मिक शिक्षा का नया पाठ्यक्रम तैयार कर रहा है। पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने से पहले प्राधिकरण ने अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और धर्मगुरुओं के साथ विस्तृत बैठक कर उनके सुझाव आमंत्रित किए। इसका उद्देश्य पाठ्यक्रम को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के अनुरूप तैयार करना है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सभागार में आयोजित बैठक की अध्यक्षता राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने की। उन्होंने कहा कि धार्मिक शिक्षा का यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, सांस्कृतिक समझ और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम पाठ्यक्रम तैयार करने से पहले विभिन्न समुदायों और धर्मगुरुओं के सुझावों को शामिल किया जाएगा, ताकि यह सभी के लिए उपयोगी और संतुलित बन सके।
प्राधिकरण द्वारा तैयार किए गए प्रारंभिक ड्राफ्ट को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के दिशा-निर्देशों के अनुसार तीन स्तरों में विभाजित किया गया है। इसमें कक्षा एक और दो को आधारभूत स्तर, कक्षा तीन से पांच को प्रारंभिक स्तर तथा कक्षा छह से आठ को मध्य स्तर में रखा गया है। विद्यार्थियों की आयु और सीखने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई है, जिससे धार्मिक एवं नैतिक शिक्षा को सरल और प्रभावी तरीके से पढ़ाया जा सके। प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पाठ्यक्रम के तहत पारंपरिक लिखित परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। विद्यार्थियों का मूल्यांकन मौखिक प्रश्नोत्तर, चित्र प्रस्तुति, रचनात्मक गतिविधियों और विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से किया जाएगा। इससे बच्चों की समझ, अभिव्यक्ति क्षमता और सहभागिता का बेहतर आकलन हो सकेगा तथा उन पर परीक्षा का अतिरिक्त दबाव भी नहीं पड़ेगा।
बैठक के दौरान उपस्थित शिक्षाविदों, सामाजिक प्रतिनिधियों और धर्मगुरुओं ने पाठ्यक्रम के विभिन्न पहलुओं पर अपने सुझाव दिए। प्राधिकरण ने आश्वासन दिया कि सभी सुझावों का अध्ययन कर आवश्यक संशोधन किए जाएंगे और उसके बाद अंतिम पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा। बैठक में दून इंटरनेशनल स्कूल के चेयरमैन डी.एस. मान, डी.एस. बिंद्रा, जसवीर कौर, सुंदर सिंह चौहान, डॉ. दलजीत कौर, दयाल एम. लाल, अवतार सिंह चावला, मोहम्मद सलीम, मोहन सिंह सहित अनेक शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और समुदाय के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का मानना है कि यह पहल विद्यार्थियों को धार्मिक और नैतिक मूल्यों से जोड़ने के साथ-साथ शिक्षा को अधिक समावेशी, व्यवहारिक और मूल्यपरक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

