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उत्तराखंड में हरेला बनेगा जनआंदोलन, पहली बार एक्शन प्लान के साथ 10 लाख पौधारोपण का लक्ष्य..

उत्तराखंड में हरेला बनेगा जनआंदोलन, पहली बार एक्शन प्लान के साथ 10 लाख पौधारोपण का लक्ष्य..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला को इस वर्ष पर्यावरण संरक्षण के एक व्यापक जनअभियान के रूप में आयोजित करने की तैयारी की गई है। पहली बार राज्य सरकार और वन पंचायतों ने मिलकर हरेला पर्व के लिए विस्तृत एक्शन प्लान तैयार किया है, जिसके तहत केवल पौधारोपण ही नहीं बल्कि पौधों के संरक्षण, जनसहभागिता और सतत निगरानी पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। इस वर्ष पूरे प्रदेश में करीब 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक हरेला पर्व के दौरान विभिन्न सरकारी विभाग अपने-अपने स्तर पर पौधारोपण कार्यक्रम संचालित करते रहे हैं, लेकिन इस बार अभियान को एक साझा रणनीति के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। वन पंचायतों, जिला प्रशासन, ग्राम पंचायतों और अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर एक ऐसी कार्ययोजना बनाई गई है, जिससे पौधारोपण अभियान अधिक प्रभावी और परिणामकारी बन सके।

पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल पर रहेगा विशेष फोकस

नई कार्ययोजना में केवल पौधे लगाने तक सीमित रहने के बजाय उनके संरक्षण और जीवित रहने की दर बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसके लिए रोपण स्थलों का पहले से चयन, स्थानीय जलवायु के अनुरूप पौधों की प्रजातियों का निर्धारण, समयबद्ध रोपण और बाद की निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। वन पंचायतों और स्थानीय समुदायों को पौधों की देखरेख की जिम्मेदारी भी सौंपी जाएगी ताकि अभियान का स्थायी प्रभाव दिखाई दे। हरेला अभियान को सफल बनाने के लिए राज्य, जिला और ग्राम स्तर पर अलग-अलग समितियों का गठन किया जा रहा है। जिला स्तर पर अभियान की निगरानी और समन्वय की जिम्मेदारी जिलाधिकारियों को सौंपी जाएगी, जबकि विभिन्न विभागों के अधिकारी अपने-अपने स्तर पर अभियान को गति देंगे। ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों, वन पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय समितियों की सक्रिय भूमिका तय की गई है, जिससे प्रत्येक गांव में जनभागीदारी सुनिश्चित हो सके।

महिलाओं को मिलेगी आधी भागीदारी

इस बार अभियान की एक महत्वपूर्ण विशेषता महिलाओं की सक्रिय भागीदारी है। गठित समितियों में 50 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है। सरकार का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों में महिलाओं की भागीदारी से न केवल पौधों के संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। स्वयं सहायता समूहों और महिला मंगल दलों को भी अभियान से जोड़ने की योजना बनाई गई है। हरेला अभियान के दौरान केंद्र सरकार के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को भी व्यापक रूप से शामिल किया जाएगा। लोगों को अपनी मां के सम्मान में एक पौधा लगाने और उसके संरक्षण का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा। वन पंचायतों के माध्यम से गांव-गांव तक इस संदेश को पहुंचाने की तैयारी है ताकि अधिक से अधिक लोग पर्यावरण संरक्षण की इस पहल का हिस्सा बन सकें।

16 जुलाई से शुरू होगा एक माह का अभियान

इस वर्ष हरेला पर्व की शुरुआत 16 जुलाई से होगी और अभियान लगभग एक माह तक चलेगा। इस दौरान पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर पौधारोपण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और जैव विविधता को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्कूलों, कॉलेजों, स्वयंसेवी संस्थाओं, युवा संगठनों, महिला समूहों और सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सके। इस वर्ष हरेला पर्व का राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम अल्मोड़ा में आयोजित किया जाएगा। वन पंचायतों की सहभागिता से होने वाले इस आयोजन के माध्यम से पूरे प्रदेश को हरित उत्तराखंड का संदेश दिया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक सहभागिता और सतत विकास की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। सरकार और वन विभाग का मानना है कि पहली बार तैयार किए गए इस व्यापक एक्शन प्लान से हरेला पर्व केवल औपचारिक पौधारोपण अभियान बनकर नहीं रहेगा, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा एक स्थायी जनआंदोलन बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। यदि पौधारोपण के साथ संरक्षण और स्थानीय सहभागिता पर समान रूप से काम हुआ तो आने वाले वर्षों में प्रदेश के हरित क्षेत्र को बढ़ाने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में इस पहल की अहम भूमिका होगी।

 

 

 

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