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Wed. Aug 5th, 2026

सगंध और औषधीय पौधों की खेती से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती..

सगंध और औषधीय पौधों की खेती से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में कृषि को लाभकारी और किसानों की आय को बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार सगंध एवं औषधीय पौधों की खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। इसी कड़ी में देहरादून के सेलाकुई स्थित परफ्यूमरी एवं सगंध अनुसंधान एवं विकास संस्थान में आयोजित एक महत्वपूर्ण सेमिनार में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने प्रदेश में सगंध खेती के विस्तार को लेकर सरकार की योजनाओं और भविष्य की रणनीति साझा की। कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री ने कार्यशाला की स्मारिका का विमोचन किया और कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां तथा जलवायु सगंध एवं औषधीय पौधों की खेती के लिए अत्यंत अनुकूल हैं। सरकार इस क्षमता का अधिकतम उपयोग कर किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली फसलों से जोड़ने का प्रयास कर रही है।

कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सगंध खेती को प्रोत्साहन देने के लिए महक क्रांति नीति-2026 लागू की है। इस नीति के तहत प्रदेश में लगभग 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सगंध खेती के दायरे में लाने और करीब 91 हजार किसानों को इससे जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार का मानना है कि सगंध पौधों की खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा देगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे तथा किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

गणेश जोशी ने बताया कि राज्य में दालचीनी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए चंपावत और नैनीताल जिलों में लगभग 5200 हेक्टेयर क्षेत्र में “सिनेमन वैली” विकसित की जा रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य दालचीनी की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देना और उससे जुड़े उद्योगों को विकसित करना है। उन्होंने कहा कि इस पहल से स्थानीय किसानों के साथ-साथ उद्यमियों को भी लाभ मिलेगा। दालचीनी आधारित उत्पादों के प्रसंस्करण और विपणन के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। कृषि मंत्री ने कहा कि सीएम धामी के नेतृत्व में राज्य में एरोमा और औषधीय पौधों के क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। सरकार का उद्देश्य किसानों को ऐसी फसलों से जोड़ना है जिनकी बाजार में अधिक मांग है और जिनसे बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेती के साथ सगंध पौधों की खेती किसानों के लिए आय का अतिरिक्त स्रोत बन सकती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और कृषि क्षेत्र में नवाचार को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

पर्वतीय क्षेत्रों तक पहुंचे सगंध खेती का लाभ..

कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले किसानों को भी इस अभियान से जोड़ा जाए। उन्होंने वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर वन क्षेत्रों के आसपास सगंध एवं औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उनका कहना था कि पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसी खेती रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ पलायन की समस्या को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यदि किसानों को स्थानीय स्तर पर बेहतर आय के अवसर मिलेंगे तो युवाओं का गांवों से पलायन भी कम होगा।

गणेश जोशी ने सगंध पौधा केंद्र और अनुसंधान संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में संस्थान ने उत्तराखंड में एरोमा खेती को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। संस्थान द्वारा किए जा रहे शोध, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और तकनीकी सहयोग के माध्यम से हजारों किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीक के सहयोग से उत्तराखंड देश में सगंध एवं औषधीय पौधों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है।

कृषि मंत्री ने उम्मीद जताई कि इस सेमिनार के माध्यम से दालचीनी सहित अन्य सगंध एवं औषधीय फसलों की उन्नत खेती, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन से जुड़े नए आयाम सामने आएंगे। कार्यक्रम में शामिल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के अनुभवों से किसानों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों को नई दिशा मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों को सम्मानित किया तथा सगंध एवं औषधीय पौधों से तैयार विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता, बाजार संभावनाओं और निर्यात के अवसरों पर भी जानकारी प्राप्त की। उत्तराखंड सरकार की यह पहल राज्य को देश के प्रमुख एरोमा और औषधीय पौधा उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि योजनाएं तय लक्ष्यों के अनुरूप आगे बढ़ती हैं तो आने वाले वर्षों में सगंध खेती प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे सकती है।

 

 

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