उत्तराखंड में जुलाई का बिजली बिल होगा महंगा, यूपीसीएल ने बढ़ाई एफपीपीसीए दरें..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं को जुलाई महीने में एक बार फिर महंगे बिजली बिल का सामना करना पड़ेगा। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने ईंधन एवं बिजली खरीद लागत समायोजन (एफपीपीसीए) की नई दरें जारी कर दी हैं। इन दरों का प्रभाव जुलाई माह के बिजली बिलों में दिखाई देगा और उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में अधिक भुगतान करना होगा। पिछले कुछ महीनों से प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं पर एफपीपीसीए के रूप में अतिरिक्त वित्तीय बोझ लगातार बढ़ रहा है। मई और जून के बिजली बिलों में भी इस समायोजन के कारण उपभोक्ताओं को अधिक राशि चुकानी पड़ी थी। अब जुलाई के लिए भी नई दरें लागू होने से बिजली खर्च में फिर बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। यूपीसीएल के अधिकारियों के अनुसार गर्मी के मौसम में प्रदेश में बिजली की मांग सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक हो जाती है। मांग बढ़ने के कारण निगम को अपनी आवश्यकता पूरी करने के लिए खुले बाजार से अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ती है। खुले बाजार में बिजली की कीमतें अधिक होने के कारण बिजली खरीद पर आने वाला अतिरिक्त खर्च सीधे ईंधन एवं बिजली खरीद लागत समायोजन (Fuel and Power Purchase Cost Adjustment – FPPCA) के माध्यम से उपभोक्ताओं के बिलों में जोड़ा जाता है। इसी व्यवस्था के तहत हर महीने एफपीपीसीए की दरों की समीक्षा कर उन्हें लागू किया जाता है।
यूपीसीएल के मुख्य अभियंता (व्यावसायिक) एन.एस. बिष्ट की ओर से जारी आदेश के अनुसार जुलाई माह के लिए नई एफपीपीसीए दरें प्रभावी कर दी गई हैं। इन दरों के आधार पर तैयार होने वाले बिजली बिलों में उपभोक्ताओं से अतिरिक्त राशि वसूली जाएगी। यूपीसीएल ने स्पष्ट किया है कि यह शुल्क बिजली खरीद पर आई अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए लगाया जाता है और यह नियमित बिजली दरों से अलग होता है। प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को लगातार तीसरे महीने एफपीपीसीए के कारण अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है। मई और जून के बिलों में भी यह समायोजन लागू किया गया था, जिससे घरेलू, व्यावसायिक और अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। अब जुलाई में भी यही स्थिति रहने से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। विशेष रूप से गर्मियों के दौरान एयर कंडीशनर, कूलर, पंखों और अन्य विद्युत उपकरणों के अधिक उपयोग से बिजली की खपत पहले ही बढ़ जाती है। ऐसे में एफपीपीसीए के अतिरिक्त शुल्क से कुल बिल और अधिक बढ़ सकता है।
क्या होता है एफपीपीसीए?
एफपीपीसीए यानी फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत बिजली उत्पादन या बाहरी स्रोतों से बिजली खरीदने में होने वाले अतिरिक्त खर्च का समायोजन उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में किया जाता है। जब बिजली वितरण कंपनियों को महंगे स्रोतों से बिजली खरीदनी पड़ती है या ईंधन लागत बढ़ जाती है, तब नियमानुसार इस अतिरिक्त खर्च का एक हिस्सा उपभोक्ताओं से एफपीपीसीए के रूप में वसूला जाता है। इसी कारण यह शुल्क हर महीने परिस्थितियों के अनुसार कम या ज्यादा हो सकता है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि प्रदेश में बिजली की मांग अधिक बनी रहती है और खुले बाजार में बिजली की कीमतों में कमी नहीं आती है, तो आने वाले महीनों में भी एफपीपीसीए का असर बिजली बिलों पर देखने को मिल सकता है।फिलहाल जुलाई माह के लिए नई दरें लागू हो चुकी हैं और उपभोक्ताओं को इस महीने के बिजली बिल में इसका अतिरिक्त भुगतान करना होगा।..

