ग्रिड फेल होने का खतरा होगा कम, बिजली आपूर्ति सुरक्षित बनाने को नया ड्राफ्ट तैयार..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में बढ़ती बिजली मांग और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राज्य की विद्युत व्यवस्था को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने बिजली ग्रिड की स्थिरता और आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए नए सहायक सेवा विनियमों का मसौदा जारी किया है। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच बेहतर संतुलन बनाए रखना तथा किसी भी आपात स्थिति में ग्रिड को सुरक्षित रखना है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद बिजली मांग में अचानक वृद्धि या उत्पादन में कमी जैसी परिस्थितियों के दौरान पूरे सिस्टम पर दबाव कम किया जा सकेगा। इससे बड़े स्तर पर बिजली बाधित होने या ग्रिड फेल होने जैसी घटनाओं की संभावना में कमी आएगी।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बिजली ग्रिड के सुचारु संचालन के लिए उसकी फ्रीक्वेंसी का निर्धारित स्तर पर बने रहना बेहद जरूरी होता है। प्रस्तावित नियमों में राज्य के ट्रांसमिशन नेटवर्क को अधिक सक्षम बनाने और ग्रिड फ्रीक्वेंसी को मानक स्तर के आसपास बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया है।नियामक आयोग का मानना है कि आधुनिक बिजली प्रणाली में केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मांग और आपूर्ति के बीच वास्तविक समय में संतुलन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी सोच के तहत नई सहायक सेवाओं की व्यवस्था तैयार की गई है। ड्राफ्ट विनियमों के तहत ग्रिड सुरक्षा और संतुलन बनाए रखने के लिए दो प्रकार के रिजर्व तंत्र विकसित किए जाएंगे। पहला स्तर सेकेंडरी रिजर्व का होगा। यह व्यवस्था किसी भी असामान्य स्थिति में स्वचालित संकेत मिलने के कुछ ही सेकंड के भीतर सक्रिय हो जाएगी। इसकी मदद से ग्रिड पर अचानक बढ़े दबाव को नियंत्रित किया जा सकेगा और बिजली आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
दूसरे स्तर पर टर्शियरी रिजर्व की व्यवस्था होगी। यदि ग्रिड को लंबे समय तक अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता होती है तो यह रिजर्व सक्रिय होगा और ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बैकअप उपलब्ध कराएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी तकनीकी बाधा या मांग में अचानक उछाल की स्थिति में भी उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति प्रभावित न हो। नई व्यवस्था में बिजली उत्पादन और आपूर्ति से जुड़ी कंपनियों के लिए प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन प्रणाली भी प्रस्तावित की गई है। ग्रिड संतुलन बनाए रखने के लिए राज्य स्तरीय नियंत्रण केंद्र द्वारा आवश्यकतानुसार कंपनियों को स्वचालित संकेत भेजे जाएंगे। जो कंपनियां इन संकेतों पर तेजी और सटीकता के साथ प्रतिक्रिया देंगी, उन्हें अतिरिक्त आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों को प्रति यूनिट अतिरिक्त भुगतान का लाभ मिलेगा, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वालों पर निगरानी रखी जाएगी। विशेष रूप से उन कंपनियों को पुरस्कृत किया जाएगा जो निर्धारित मानकों के अनुसार त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देकर ग्रिड को स्थिर रखने में सहयोग करेंगी।
प्रस्तावित नियमों में जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया गया है। यदि कोई बिजली प्रदाता लगातार खराब प्रदर्शन करता है और ग्रिड प्रबंधन में अपेक्षित सहयोग नहीं देता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी। ऐसे मामलों में संबंधित इकाइयों को अस्थायी रूप से सेवा से अलग किया जा सकता है। इसके अलावा बिजली कानूनों के तहत दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान रखा गया है ताकि सभी भागीदार संस्थाएं निर्धारित मानकों का पालन करें। नई नीति के तहत ग्रिड की आवश्यकता के अनुसार बिजली की खरीद और बिक्री बाजार आधारित प्रणाली के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए पावर एक्सचेंज प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा, जहां प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। विशेष परिस्थितियों में अतिरिक्त बिजली उपलब्ध रखने वाले ऐसे बिजली घरों की सेवाएं भी ली जा सकेंगी, जिनका सीधे तौर पर वितरण कंपनी के साथ कोई दीर्घकालिक अनुबंध नहीं है। आपात स्थिति में उनकी अतिरिक्त उत्पादन क्षमता का उपयोग कर ग्रिड को स्थिर बनाए रखा जा सकेगा।
फिलहाल आयोग ने मसौदा सार्वजनिक कर दिया है और इस पर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े हितधारकों, विशेषज्ञों तथा आम नागरिकों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। प्राप्त सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा के बाद अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होती है तो उत्तराखंड की बिजली प्रणाली अधिक सुरक्षित, लचीली और आधुनिक बन सकेगी। साथ ही भविष्य में बढ़ती ऊर्जा मांग के बीच उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।

