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Wed. Aug 5th, 2026

एक साल बाद भी नहीं भूले आपदा का दर्द, खेती और स्वरोजगार से संभल रहा धराली..

एक साल बाद भी नहीं भूले आपदा का दर्द, खेती और स्वरोजगार से संभल रहा धराली..

 

उत्तराखंड: विनाशकारी आपदा की दर्दनाक यादें आज भी धराली के लोगों के जेहन में ताजा हैं। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को हमेशा के लिए खो दिया, जबकि कुछ आज भी अपनों का अंतिम दर्शन न कर पाने की पीड़ा के साथ जीवन बिता रहे हैं। इस त्रासदी ने न केवल लोगों के घर उजाड़े, बल्कि कई परिवारों की आजीविका भी छीन ली। आपदा के बाद बड़ी संख्या में प्रभावित परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े। वर्तमान में करीब 30 परिवार किराए के मकानों या रिश्तेदारों के यहां रहकर जीवनयापन कर रहे हैं। हालांकि तमाम मुश्किलों के बावजूद गांव के लोग अब धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौटने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रशासन के अनुसार प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया जारी है। अब तक 21 परिवारों के पुनर्वास के लिए भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। 66 लोगों से संबंधित पुनर्वास प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जबकि 25 अन्य परिवारों के मामलों में भी जल्द कार्रवाई की जाएगी।रोजगार के मोर्चे पर भी ग्रामीण नए विकल्प तलाश रहे हैं। स्थानीय लोग अब सेब बागवानी और नगदी फसलों की खेती को अपनी आजीविका का प्रमुख आधार बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि खीर गंगा के किनारे मजबूत सुरक्षा उपाय किए जाएं, तो नदी के दोनों ओर बागवानी और खेती को सुरक्षित तरीके से फिर से विकसित किया जा सकता है।

आपदा में जिन लोगों के होटल और दुकानें पूरी तरह सुरक्षित बच गई थीं, वे धीरे-धीरे अपने कारोबार को दोबारा शुरू करने में जुटे हैं। वहीं, गांव के युवा भी स्वरोजगार के नए अवसर तलाश रहे हैं। कई युवतियों ने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभालने के लिए ट्रैकिंग और पर्यटन से जुड़े कार्यों को अपनाया है। ग्रामीणों का कहना है कि आपदा के गहरे जख्म शायद कभी पूरी तरह नहीं भर पाएंगे, लेकिन वे हिम्मत के साथ जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने और अपने गांव को फिर से आबाद करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं।

 

 

 

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